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विश्व शांति में अहिंसा का सिद्धांत, पुरोधा माना गया

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2 अक्टूबर विश्व अहिंसा दिवस पर विशेष

विश्व शांति में अहिंसा का सिद्धांत, पुरोधा माना गया

डॉ बी आर नलवाया मंदसौर

भगवान महावीर स्वामी ने प्राणीमात्र के कल्याण के लिए अनेक उपदेश दिए। उनका एक महत्वपूर्ण उपदेश है- “आहिंसा परमो धर्मः” का है अर्थात अहिंसा ही परम धर्म है ।हिंसा कभी धर्म नहीं हो सकती ।सब प्राणियों को अपना जीवन प्यारा है। सुख सब को अच्छा लगता है, और दुख बुरा। वध सबको अप्रिय है , और जीवन प्रिय। अतः प्राणी जीना चाहते है को अच्छा लगता है और दुःख बुरा।
अहिंसा का अर्थ केवल प्राणियों का घात करने तक ही सीमित नहीं है, अपितु इसका अर्थ बहुत व्यापक है। किसी भी प्राणी को संताप न देना अहिंसा है। स्पष्ट होता है कि जैन धर्म में अहिंसा का अर्थ केवल मनुष्य की हिंसा करने मात्र तक भी सीमित नहीं है, वरन पशुओं, पक्षियों, वनस्पतियों यहाँ तक कि पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि आदि के विद्यमान चर्मचक्षुओं से दृष्टिगोचर नहीं होने वाले जीवों की हिंसा करने तक भी व्याप्त है। प्रभु महावीर ने फरमाया कि जन-जन के कल्याण के लिए यही कि मनुष्य किसी भी प्राणी को मन ,वचन ,काया से हानि न पहुंचाए न हिंसा करने वालों की अनुमोद‌ना करे। सभी प्राणी जीना चाहते हैं, मरना कोई नहीं चाहता है। यह सिद्धान्त ‘जीओ औरजीने दो” जो वर्तमान में बहुत ही खरा उतरता है। विश्व में इस सिद्धांत की महती आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने 15 जून 2007 में घोषणा की कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिन 2 अक्टूम्बर को “विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाए। 27 सितम्बर 2015 को अमेरिका के फेसबुक के कार्यालय के बोर्ड पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी ने “अहिंसा परमो धर्म “लिखा एवं इस वाक्य के माध्यम से उन्होंने अहिंसा के महत्त्व को विश्व के सामने रखा।

अहिंसा और जीव दया सभी धर्म का मूल है। भगवान महावीर ने एक मंत्र दिया ‘जीओ और जीने दो।’ ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह कहते हैं कि ओह माँसाहारियों ! जब तुम अपना हाथ फैलाओ तो मैं अपनी आँखें बंद कर लूंगा, क्योंकि आपके हाथ खून से सने हैं। कुरान शरीफ के अनुसार, जहाँ दया है वहीं ईश्वर है। आगमों में इसे ‘जहा दया तहो धम्मो’ कहा है। ‘मनुष्य दूसरे जानवरों को मारता है तथा दूसरों को खिलाता है, उस व्यक्ति का भी अंगछेदन होगा।’ ईसाई धर्म गुरु श्री पोप फ्रांसिस ने 18 जून 2015 को पूरे विश्व के नागरिकों से अपील की कि वे प्राणियों की रक्षा के लिए अपने खाने की आदतों को बदलें क्योंकि इससे वातावरण को भारी नुकसान हो रहा है। पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा ने अमरीका के सभी नागरिकों से सप्ताह में एक बार माँसाहार का त्याग करने का आह्वान किया।

हिंसा मुक्त जीवन जीने का भगवान महावीर ने यह भी कहा “जो तुम अपने लिए चाहते हो, वही दूसरों के लिए भी चाहो और जो जो अपने लिए नहीं चाहते हो, वह दूसरों के लिए कभी भी नहीं चाहो।महावीर की ये पक्तियाँ आज भी प्रासंगिक है। ये पंक्तियां वर्तमान युग में काफी प्रेरणादायक है। इन्हीं पंक्तियों ने विश्व के बड़े से बड़े वैज्ञानिक ,दार्शनिको, राजनीतिज्ञों को एक नई रोशनी प्रदान की। विश्व का कल्याण कभी भी महायुद्धों या हिंसा से संभव नहीं है।

महावीर ने अहिंसा के सूत्र को बहुत प्रबल, पुष्ट एवं समर्थ बनाया। अहिंसा सबसे मूल्यवान इसलिए है क्योंकि वह त्रस एवं स्थावर सभी प्राणियों के लिए क्षेभकारी, कल्याणकारी तथा पर्यावरण की सभी समस्याओं के लिए समाधानकारी है। अहिंसा को प्रथम धर्म कहा कि उसमें समाज की तत्कालीन समस्याओ का समाधान निहित है। भगवान महावीर की अहिंसा में उस विराट पिता का हृदय है, जो सुमेरु-सा सुदृढ़ कठोर कर्तव्य लिए है। वही महात्मा गाँधी की अहिंसा जितनी राजनीतिक थी, उतनी धार्मिक नहीं।

वर्तमान समय में आतंकवाद, नस्लवाद, जातिवाद, आपसी झगड़ों से संपूर्ण संसार ग्रसित है। चारों और हाहाकार मचा हो, प्राणी मात्र सुख शांति आनंद के लिए तरस रहे हो, ऐसे नाजुक क्षणों में सिर्फ महावीर स्वामी की अहिंसा ही विश्वशांति के लिए प्रासंगिक हो सकती है।

डॉ. बी. आर. नलवाया , मन्दसौर

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