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22 भारतीय नाविक बंधक यमन और सोमालिया के पास दो जहाज अगवा,भारतीय नौसेना अलर्ट

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नई दिल्ली: अरब सागर से सटे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर एक बार फिर समुद्री डकैती का खतरा मंडराने लगा है। यमन और सोमालिया के तटीय इलाकों में गश्त कर रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर स्वचालित हथियारों से लैस लुटेरों ने दो अलग-अलग व्यापारिक जहाजों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इन अपहृत जहाजों पर 22 भारतीय नागरिक सवार हैं, जिन्हें बंधक बना लिया गया है। इस घटना के बाद भारतीय नौवहन मंत्रालय और नौसेना अलर्ट मोड पर आ गई हैं, हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक सभी भारतीय क्रू मेंबर फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

पहला हमला अदन की खाड़ी में यमन तट से करीब 30 समुद्री मील की दूरी पर हुआ। यहाँ इरीट्रिया के ध्वज वाले तेल उत्पाद टैंकर एम.टी. सिबू 1 (M.T. Sibu 1) को 6 सशस्त्र डाकुओं ने एक छोटी नौका के ज़रिए घेर लिया और हथियारों के बल पर उस पर कब्जा कर लिया। इस टैंकर पर कुल 20 क्रू मेंबर मौजूद हैं, जिनमें से 16 भारतीय नागरिक हैं, जबकि बाकी सदस्य सीरिया, सूडान और इराक के रहने वाले हैं।

दूसरा वाकया सोमालिया के पुंटलैंड तटीय इलाके के पास सामने आया, जहाँ कैमरून के ध्वज वाले मालवाहक जहाज एम/वी लुटुफ (M/V LUTUF) का अपहरण कर लिया गया। पोलर मूवमेंट शिपिंग द्वारा संचालित यह जहाज मोगादिशू स्थित तुर्की सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए संचार, सैटेलाइट और सुरक्षा उपकरण ले जा रहा था। दो तेज रफ्तार बोट्स में सवार 8 एके-47 से लैस डाकुओं ने इस जहाज पर धावा बोला। हालांकि हमले के वक्त क्रू मेंबर्स ने खुद को सुरक्षित ‘सिटाडेल’ केबिन में बंद कर लिया था, लेकिन लुटेरों ने दरवाजा तोड़कर जहाज के मुख्य नियंत्रण कक्ष पर कब्जा जमा लिया। इस जहाज के 10 सदस्यीय दल में 6 भारतीय नाविकों के अलावा तुर्की, जॉर्जिया और सर्बिया के सुरक्षा कर्मी शामिल हैं।

घटना की भनक मिलते ही भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में तैनात अपने युद्धपोतों और समुद्री निगरानी विमानों को सक्रिय कर दिया है। भारत का विदेश मंत्रालय और नौवहन मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों व स्थानीय दूतावासों के साथ लगातार समन्वय बना रहे हैं। संबंधित शिपिंग कंपनियों को भी ई-नाविक (e-Navik) मरीन कैजुअल्टी सिस्टम के माध्यम से पल-पल की जानकारी साझा करने का निर्देश दिया गया है ताकि सभी 22 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित रिहाई जल्द से जल्द सुनिश्चित की जा सके।

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