Home मध्य प्रदेश जबलपुर : लड्डू गोपाल के भरोसे चलती है मिठाई की दुकान…न कोई...

जबलपुर : लड्डू गोपाल के भरोसे चलती है मिठाई की दुकान…न कोई मालिक, न कैशियर और न सेल्समैन

  • जबलपुर में एक अनोखी मिठाई की दुकान है, जो पूरी तरह से विश्वास और ईमानदारी पर टिकी हुई है। इस दुकान में न कोई सेल्समैन है, न ही कोई कैशियर। ग्राहक अपनी पसंद की मिठाई उठाते हैं और रुपये रखने के लिए रखे गए एक बाक्स में डाल देते हैं।

लोकेश शर्मा

जबलपुर। लड्डू गोपाल मिठाई की दुकान ने विश्वास और ईमानदारी की एक अनोखी मिसाल पेश की है। जिसकी चर्चा इन दिनों दूर तक है। इसमें न कोई सेल्समैन है, न ही कोई कैशियर। ये पूरी दुकान भगवान भरोसे चल रही है।

आधुनिक दौर में सहसा विश्वास करना जब किसी पर मुश्किल होता है तब नेपियर टाउन में एक ऐसी दुकान है जो पूरी तरह से विश्वास और ईमानदारी पर टिकी हुई है। इस दुकान का न कोई मालिक है, न कोई कैशियर. यह पूरी तरह से भगवान के भरोसे चल रही है। यहां आने वाला हर ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार मिठाई उठाता है और पूरी ईमानदारी से रुपये रखकर चला जाता है।

ऐसे हुई शुरुआत

मिठाई बनाने का काम करने वाले विजय पांडे बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है। एक दिन उनकी दुकान पर एक व्यक्ति आया, जो मिठाई लेना चाहता था लेकिन उसके पास रुपये नहीं थे।

तब उन्होंने बिना कोई सवाल किए उसे मिठाई दे दी और कहा कि जब संभव हो, वह चुका सकते हैं। इसी घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्यों न पूरी दुकान को इसी भरोसे पर चलाया जाए।

जब संभव हो देनदारी चुका दो

अब इस दुकान में ग्राहक आते हैं, अपनी पसंद की मिठाई उठाते हैं और रुपये रखने के लिए रखे गए एक बाक्स में डाल देते हैं। अगर खुल्ले रुपये की जरूरत होती है, तो पास में रखे खुले रुपये से खुद ही बाकी रकम चुका सकते हैं और जिनके पास रुपये नहीं वे भी मिठाई ले जा सकते हैं। इस विश्वास के साथ कि जब भी संभव होगा, वे अपनी देनदारी पूरी कर देंगे।

प्रयोग अनोखा तो चर्चा होनी ही थी

यह अनोखा प्रयोग चर्चा का विषय बन हुआ है। लोग न सिर्फ मिठाई खरीदने बल्कि इस अनूठे माडल को देखने और समझने भी आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है, और लोग इसे अपनी तरह का पहला प्रयोग मान रहे हैं।

https://ntvtime.com/wp-content/uploads/2025/03/ntvtime_india-20250317-0010.mp4

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version