Home मध्य प्रदेश विकास के नाम पर विनाश? इंदौर में ‘स्मार्ट सिटी’ की कीमत चुका...

विकास के नाम पर विनाश? इंदौर में ‘स्मार्ट सिटी’ की कीमत चुका रही आम जनता

0

इंदौर (विशेष संवाददाता):

देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में विकास की तेज रफ्तार अब आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। शहर को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने की होड़ में और चौड़ी सड़कों, फ्लाईओवर तथा अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के नाम पर चल रहे अंधाधुंध विकास कार्यों ने नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। चारों तरफ उड़ती धूल, खुदी हुई सड़कें, घंटों लगने वाला ट्रैफिक जाम और पेड़ों की लगातार कटाई ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह विकास है या विनाश?

धूल का गुबार और सांसों का संकट:
शहर के कई प्रमुख मार्ग इस समय निर्माण कार्यों के कारण खुदे पड़े हैं। ड्रेनेज लाइन, केबल बिछाने या सड़क चौड़ीकरण के नाम पर महीनों से काम अटका पड़ा है। इन निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल ने शहर की आबोहवा को जहरीला बना दिया है। सांस के मरीजों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। प्रशासन की ओर से धूल रोकने के लिए पानी के छिड़काव या अन्य जरूरी उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं।

रेंगता ट्रैफिक, बढ़ता तनाव:
फ्लाईओवर निर्माण और मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण शहर के यातायात की कमर टूट गई है। विजयनगर, भंवरकुआं, पलासिया और राजवाड़ा जैसे व्यस्त इलाकों में घंटों ट्रैफिक जाम लगना अब आम बात हो गई है। ऑफिस जाने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्गों की कमी और खराब ट्रैफिक प्रबंधन ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

विकास की भेंट चढ़ते पेड़ और उजड़ते आशियाने:
चौड़ी सड़कों की चाह में शहर के पुराने और हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस अंधाधुंध कटाई से शहर का तापमान बढ़ रहा है और हरियाली खत्म हो रही है। इसके अलावा, कई इलाकों में विकास परियोजनाओं के लिए अतिक्रमण हटाने के नाम पर लोगों के घर और दुकानें तोड़े गए हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं और छोटे व्यापारियों का रोजगार छिन गया है।

जनता के सवाल, प्रशासन मौन:
आम नागरिक अब सवाल पूछने लगे हैं कि क्या विकास का मतलब सिर्फ कंक्रीट के जंगल खड़े करना है? क्या विकास की कोई योजना नहीं बनाई जा सकती जिससे जनता को कम से कम परेशानी हो? विकास कार्यों में होने वाली देरी और गुणवत्ता की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है।

एक स्थानीय निवासी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से काम हो रहा है, उसने हमारा जीना मुहाल कर दिया है। ऐसा लगता है कि विकास की कीमत सिर्फ आम आदमी को ही चुकानी पड़ रही है।”

प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को अब यह समझना होगा कि ‘स्मार्ट सिटी’ का असली मतलब सिर्फ चमचमाती इमारतें नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए एक सुलभ, स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन भी है। विकास और जनता की सुविधा के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी मांग है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version