Thursday, April 30, 2026

TOP NEWS

डिंडोरी जिले में विशेष...

डिंडोरी। Security Skills Council of India (SSCI) एवं Security and Intelligence Services Limited...

आम आदमी पार्टी ने...

किसानों की सुनी समस्या, जिला प्रशासन करे जल्द निराकरण* डिंडौरी (शहपुरा):-आम आदमी पार्टी (AAP)...

इंदौर: भीषण गर्मी में...

संवाददाता आशीष जवखेड़कर इंदौर में भीषण गर्मी के बीच जहां आम लोग घरों से...

इंदौर सिटी ACP के...

संवाददाता आशीष जवखेड़कर इंदौर में रविवार देररात को एसीपी रूबीना मिजवानी और उनके पति...
HomeUncategorized"79 साल बाद भी… बचपन बोझ तले"

“79 साल बाद भी… बचपन बोझ तले”

NtvTime_Update

आज़ादी के 79 साल पूरे होने को हैं… लेकिन क्या सच में देश आज़ाद है, अगर इसके छोटे-छोटे नागरिक अब भी अपने बचपन से आज़ाद नहीं हो पाए?

ये तस्वीरें किसी एक होटल की नहीं… बल्कि भारत की कई गलियों, चौराहों और दुकानों की सच्चाई हैं।
18 साल से कम उम्र के ये बच्चे — जिनके हाथ में किताबें और कॉपी-कलम होनी चाहिए — उनके हाथ में है ट्रे, बर्तन और झाड़ू।

ये बच्चे अपने सपनों को छोड़… मजबूरी का बोझ ढो रहे हैं। जबकि मंच पर बैठकर नेता ‘भारत के उज्ज्वल भविष्य’ की बातें करते हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

एक आम नागरिक के लिए ये कोई आंकड़ा नहीं… बल्कि रोज़ की हकीकत है।
बालश्रम न सिर्फ एक अपराध है… बल्कि बच्चों के बचपन और देश के भविष्य की चोरी है।

सवाल सिर्फ इतना है — आज़ादी के इतने साल बाद भी, क्या हम इन बच्चों को उनके बचपन की आज़ादी दिला पाए हैं?
क्योंकि जब तक हर बच्चा स्कूल में नहीं, तब तक हमारी आज़ादी अधूरी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments