Sunday, August 30, 2026

TOP NEWS

सरकारी आवास में थानाध्यक्ष...

ब्रेकिंग न्यूज़….बस्ती जिले से बड़ी खबर..बस्ती। वाल्टरगंज थाने में तैनात थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश...

आज का राशिफल30 अगस्त...

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)आज आपके पास पर्याप्त...

मनीमाजरा में 2 सितंबर...

मनीमाजरा में 2 सितंबर को निकलेगी भव्य श्री कृष्ण शोभायात्रा4 सितंबर को धूमधाम...

13 मांगों को लेकर...

इलियास खानजिला गडचिरोलीहेडलाइन:13 मांगों को लेकर कांग्रेस का 31 अगस्त को वडसा में...
HomeUncategorized"79 साल बाद भी… बचपन बोझ तले"

“79 साल बाद भी… बचपन बोझ तले”

NtvTime_Update

आज़ादी के 79 साल पूरे होने को हैं… लेकिन क्या सच में देश आज़ाद है, अगर इसके छोटे-छोटे नागरिक अब भी अपने बचपन से आज़ाद नहीं हो पाए?

ये तस्वीरें किसी एक होटल की नहीं… बल्कि भारत की कई गलियों, चौराहों और दुकानों की सच्चाई हैं।
18 साल से कम उम्र के ये बच्चे — जिनके हाथ में किताबें और कॉपी-कलम होनी चाहिए — उनके हाथ में है ट्रे, बर्तन और झाड़ू।

ये बच्चे अपने सपनों को छोड़… मजबूरी का बोझ ढो रहे हैं। जबकि मंच पर बैठकर नेता ‘भारत के उज्ज्वल भविष्य’ की बातें करते हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

एक आम नागरिक के लिए ये कोई आंकड़ा नहीं… बल्कि रोज़ की हकीकत है।
बालश्रम न सिर्फ एक अपराध है… बल्कि बच्चों के बचपन और देश के भविष्य की चोरी है।

सवाल सिर्फ इतना है — आज़ादी के इतने साल बाद भी, क्या हम इन बच्चों को उनके बचपन की आज़ादी दिला पाए हैं?
क्योंकि जब तक हर बच्चा स्कूल में नहीं, तब तक हमारी आज़ादी अधूरी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments