दीपक तिवारी
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर यौन उत्पीड़न और अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने के आरोपी की जमानत अर्जी सशर्त स्वीकार कर ली है. यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने नरेश मीणा उर्फ नरसाराम मीणा की जमानत अर्जी पर उसके अधिवक्ता कमलेश कुमार द्विवेदी व सौरभ द्विवेदी और सरकारी वकील की दलीलों को सुनकर दिया.
याची के खिलाफ आगरा के खंडौली थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार याची ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे यह कहकर धोखा दिया कि वह उसे उत्तर प्रदेश पुलिस में उसे भर्ती कराएगा. इसके लिये उसने पीड़िता से 9 लाख रुपये ले लिये. इसके बाद उसने पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किया और उसका अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया.
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची पूरी तरह निर्दोष है. उसे गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है. उसका इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है. अपराधी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. एफआईआर में 4 महीने की देरी हुई है. इस देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.
एजीए ने जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया, लेकिन इस तथ्य को नहीं नकारा कि याची का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. जमानत के समर्थन में यह भी कहा गया कि याची एक ईमानदार व्यक्ति के रूप में पीड़िता की देखभाल करने के लिए तैयार है. जैसे कि वह उसकी पत्नी हो पीड़िता वयस्क है. याची 21 सितंबर 2024 से जेल में बंद है. यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा.
