वॉशिंगटन: अमेरिका से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिकी इतिहास में पहली बार किसी अपराधी को दी जाने वाली सजा-ए-मौत का इंटरनेट और टेलीविजन पर लाइव प्रसारण (Live Telecast) किया जाएगा। यह खौफनाक सजा ठीक उसी जगह दी जाएगी, जहां आज से 17 साल पहले एक सिरफिरे ने 13 बेगुनाह सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और सेना के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, फोर्ट हूड सैन्य अड्डे (वर्तमान नाम फोर्ट कावासोस) पर हुए भीषण नरसंहार के मुख्य दोषी और पूर्व आर्मी मेजर व साइकियाट्रिस्ट निदाल मलिक हसन को मौत की सजा देने के लिए 3 दिसंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस सजा को मंजूरी दिए जाने के बाद रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि इस सजा-ए-मौत को सार्वजनिक रूप से लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला और क्या थी वजह?
साल 2009 में अमेरिकी सेना के मनोचिकित्सक (Psychiatrist) मेजर निदाल हसन ने टेक्सस के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे के एक मेडिकल सेंटर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस आत्मघाती हमले में 13 निहत्थे अमेरिकी सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। कोर्ट मार्शल के दौरान निदाल हसन ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा था कि उसने अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान और इराक जाने से रोकने व तालिबान की रक्षा के लिए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था।
मिलिट्री फायरिंग स्क्वाड से मिलेगी सजा
इस ऐतिहासिक सजा के लिए अमेरिकी सेना ने मिलिट्री फायरिंग स्क्वाड (गोली मारना) का तरीका चुना है। प्रथम विश्व युद्ध और दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिकी सेना में इस तरह की सजा का यह बेहद दुर्लभ मामला है। दोषी निदाल हसन (उम्र 56 वर्ष) को उसी सैन्य अड्डे पर ले जाया जाएगा और लाइव कैमरों के सामने कमांडो की एक टीम उसे गोलियों से भून देगी।
लाइव प्रसारण को लेकर दुनिया भर में छिड़ी बहस
पेंटागन के इस फैसले के सामने आते ही वैश्विक स्तर पर कानूनी और मानवाधिकार के मोर्चे पर विवाद शुरू हो गया है। मानवाधिकार संगठनों (Human Rights Organizations) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि सजा-ए-मौत का लाइव प्रसारण करना बर्बरता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है और समाज में हिंसा को बढ़ावा दे सकता है। मनोचिकित्सकों ने भी चेतावनी दी है कि इसे लाइव देखने से आम जनता में मानसिक तनाव (PTSD) बढ़ सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, इस हमले में बचे हुए सैनिक और पीड़ितों के परिवार इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। हमले में 7 गोलियां खाने के बाद भी जिंदा बचे पूर्व आर्मी सार्जेंट अलोंजो लंसफोर्ड ने कहा कि निदाल हसन के अपराध को देखते हुए गोली मारने की सजा बिल्कुल सही है, हालांकि उन्होंने भी इसे लाइव दिखाने पर अपनी चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस क्रूरतम अपराध के अंजाम को दुनिया के सामने लाइव दिखाकर वह आतंकवाद और गद्दारी के खिलाफ एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं।
अब पूरी दुनिया की नजरें 3 दिसंबर पर टिकी हैं, जब आधुनिक इतिहास में पहली बार कैमरे के सामने किसी कानूनी सजा-ए-मौत का सीधा प्रसारण किया जाएगा।


