Friday, October 16, 2026

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बांग्लादेश में बड़ा विवाद: मंदिर के पास गोमांस पकाने के बाद अब यूनिवर्सिटी कैंपस में गोकशी की तैयारी, प्रशासन ने पहले रोका फिर दी मंजूरी

बांग्लादेश में बड़ा विवाद: मंदिर के पास गोमांस पकाने के बाद अब यूनिवर्सिटी कैंपस में गोकशी की तैयारी, प्रशासन ने पहले रोका फिर दी मंजूरी

दुर्गा पूजा के महाषष्ठी के दिन जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में ‘बीफ भोज’ के ऐलान से बढ़ा सांप्रदायिक तनाव; हिंदू संगठनों और छात्रों ने जताया कड़ा विरोध।

ढाका (बांग्लादेश): बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में मंदिर के समीप गोमांस (बीफ) की खिचड़ी पकाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सांप्रदायिक और प्रशासनिक गतिरोध में बदल गया है। इस घटना के बाद, मुस्लिम छात्रों के एक समूह ने दुर्गा पूजा के महाषष्ठी के पावन अवसर पर कैंपस के भीतर ही गाय काटने और बड़े पैमाने पर ‘बीफ भोज’ (दावत) आयोजित करने का खुला ऐलान किया है। इस संवेदनशील मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन के दोहरे रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है, जहां पहले पशु वध पर रोक लगाई गई और बाद में छात्रों के दबाव में आकर इसकी छूट दे दी गई।

मुख्य घटनाक्रम और विवाद की शुरुआत

विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर को हुई जब इस्लामिक इतिहास और संस्कृति विभाग के छात्रों ने कैंपस के मुक्तमंच (ओपन-एयर स्टेज) पर बीफ खिचड़ी पकाने का कार्यक्रम रखा। यह जगह यूनिवर्सिटी के केंद्रीय मंदिर के बेहद करीब है।

इसी रात हिंदू छात्रों ने मंदिर के पास गोमांस पकाने और मंदिर की ईंटों का इस्तेमाल चूल्हा बनाने में करने का कड़ा विरोध किया। विरोध दर्ज कराने के लिए हिंदू छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया और ह्यूमन चेन भी बनाई।

बढ़ते विवाद और तनाव को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 14 अक्टूबर को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर कैंपस में पशु वध पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

प्रशासन की इस रोक के विरोध में मुस्लिम छात्रों और ‘बांग्लादेश छात्र मजलिस’ जैसे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने आपस में चंदा जुटाकर गायें भी खरीद लीं।

इसके बाद 16 अक्टूबर को छात्रों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए प्रशासन ने यू-टर्न लिया। प्रशासन ने दूसरा स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर सीमित दायरे में आयोजन की छूट दे दी।

मंदिर समिति और हिंदू संगठनों की आपत्ति

केंद्रीय मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य सचिव जॉय साहा ने मीडिया को बताया कि शुरुआत में छात्रों ने मंदिर की पवित्रता को आहत किया। हिंदू छात्रों का कहना है कि जब वे आपत्ति दर्ज कराने गए तो उनके साथ तीखी बहस की गई। ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ ने भी बयान जारी कर कहा है कि दुर्गा पूजा के त्योहार के दौरान जानबूझकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए यह सब किया जा रहा है।

भारत-विरोधी नारे और बाहरी संगठनों की एंट्री

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बीफ पार्टी के आयोजन को लेकर कैंपस के भीतर रैलियां भी निकाली गईं, जिनमें कथित तौर पर भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी नारे लगाए गए। इस विवाद में अब ‘बांग्लादेश छात्र मजलिस’ जैसे बाहरी छात्र संगठन भी कूद पड़े हैं, जिन्होंने इस आयोजन के लिए अतिरिक्त गायें दान करने का वादा किया है।

⚖️ प्रशासन का यू-टर्न और मौजूदा स्थिति

विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर मोहम्मद आज़म खान ने पहले स्वच्छता और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर पशु वध पर बैन लगाया था। हालांकि, जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव अब्दुल अलीम आरिफ ने पुष्टि की कि छात्र प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया। अब प्रशासन ने हिदायत दी है कि पशु वध मंदिर के बिल्कुल सामने न किया जाए और इसे धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शांत तरीके से निपटाया जाए। इसके बावजूद, दुर्गा पूजा के पहले ही दिन कैंपस में इस तरह के आयोजन से हिंदू समुदाय और छात्रों के बीच भारी असुरक्षा और तनाव का माहौल है।

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