अल नीनो का कहर: 2027 की शुरुआत तक दुनिया भर में मचेगी तबाही, भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे का हाई अलर्ट
नई दिल्ली: वैश्विक मौसम प्रणालियों में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि ‘अल नीनो’ (El Nino) प्रभाव ने अब बेहद खतरनाक रफ्तार पकड़ ली है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से सक्रिय हो रहा अल नीनो साल 2027 की शुरुआत (फरवरी 2027) तक पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसके बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है, जिससे आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर मौसम का चक्र पूरी तरह से अस्त-व्यस्त होने वाला है।
मौसम वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो के इस तरह रफ्तार पकड़ने से आने वाले समय में दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ेगी। इसके कारण केवल तापमान ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) का सिलसिला भी तेज हो जाएगा। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस प्रभाव के कारण कुछ देशों को भीषण सूखे (Drought) का सामना करना पड़ेगा, जबकि कई क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ (Floods) और मूसलाधार बारिश से भारी तबाही मच सकती है।
भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या होगा असर?
भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अल नीनो का यह ट्रेंड बेहद चिंताजनक माना जाता है। अमूमन अल नीनो के सक्रिय होने से दक्षिण-पश्चिमी मानसून कमजोर पड़ता है, जिससे भारत के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। कृषि प्रधान देश होने के कारण यदि फसलों को सही समय पर पानी नहीं मिला, तो इसका सीधा असर खाद्यान्न उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसके अलावा:
- जल संकट: नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से गिर सकता है, जिससे पीने के पानी की किल्लत बढ़ सकती है।
- हीटवेव का प्रकोप: 2027 की शुरुआत तक देश के कई हिस्सों में सामान्य से कहीं अधिक और जानलेवा हीटवेव (लू) चलने की आशंका है।
- अचानक आने वाली बाढ़: मौसम का मिजाज बदलने से कुछ क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक बारिश (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थितियां) होने से अचानक बाढ़ का खतरा भी बना रहेगा।
वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट और आर्थिक नुकसान
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तापमान पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है, और अल नीनो का यह नया स्पेल आग में घी का काम करेगा। अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) पैदा हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, लातिन अमेरिकी देशों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है, जिसके दौरान प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का पानी सामान्य से बहुत अधिक गर्म हो जाता है। यह गर्म पानी हवाओं के रुख को बदल देता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। आमतौर पर यह प्रभाव कुछ महीनों तक रहता है, लेकिन इसका 2027 तक खिंच जाना पर्यावरणविदों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
मौसम विभागों ने सभी सरकारों को समय रहते इससे निपटने के लिए रणनीति बनाने और जल प्रबंधन दुरुस्त करने की सलाह दी है ताकि आने वाले इस बड़े संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।


