Tuesday, October 20, 2026

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देवास में जवारा विसर्जन...

मध्य प्रदेश के देवास (राजोदा) में जवारा विसर्जन के दौरान बैंड के शोर से भड़कीं मधुमक्खियों ने 200 श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। इस हादसे में 40 लोग घायल हुए हैं, जबकि 200 डंक लगने से गंभीर एक युवक को इंदौर रेफर किया गया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

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सत्य की जीत विजयादशमी पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम विशेष संदेशनई दिल्ली:प्रधानमंत्री...

हनुमान चौक पर दशहरा...

उत्तराखंड के मंगलौर में दशहरे पर हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल दिखी। हनुमान चौक पर पूर्व विधायक स्वर्गीय हाजी सरवत करीम अंसारी के बेटों ने फूल-मालाओं और शॉल से दशहरा जुलूस का भव्य स्वागत किया।
Homeउत्तर प्रदेशवाराणसी में बाढ़ का रौद्र रूप: मणिकर्णिका घाट डूबा, छतों और तंग...

वाराणसी में बाढ़ का रौद्र रूप: मणिकर्णिका घाट डूबा, छतों और तंग गलियों में हो रहा शवदाह

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और पहाड़ों से छोड़े गए पानी के कारण वाराणसी (काशी) में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। इस विनाशकारी बाढ़ ने काशी के सबसे पवित्र महाश्मशान, मणिकर्णिका घाट, को पूरी तरह से जलमग्न कर दिया है। घाट के सभी शवदाह प्लेटफॉर्म पानी में डूब चुके हैं, जिससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हालात इतने संवेदनशील और हृदयविदारक हो चुके हैं कि अब मृतकों का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट की छतों, तंग गलियों और ऊंचे चबूतरे पर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जगह की कमी से शवदाह के लिए लंबी कतारें
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर मुख्य प्लेटफॉर्म डूबने के कारण जगह बेहद सीमित हो गई है। दूर-दराज के जिलों से अपनों के अंतिम संस्कार के लिए आ रहे शोक संतप्त परिवारों को अपनी बारी के लिए 6 से 8 घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। घाट की गलियों में पानी इस कदर भर चुका है कि शवों को नावों के जरिए छतों तक ले जाया जा रहा है।

टूट गया 84 घाटों का संपर्क, आरती का बदला स्थान
गंगा के उफान के कारण काशी के ऐतिहासिक 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया है। प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट के डूबने की वजह से विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती को अब घाट की छतों और ऊंचे होटलों के मंच पर शिफ्ट कर दिया गया है।

हजारों घरों में घुसा पानी, एनडीआरएफ मुस्तैद
गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी भी उफान पर है, जिससे तटीय इलाकों और रिहायशी कॉलोनियों में पानी भर गया है। लगभग 20,000 से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है और लोग सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गंगा में नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले 24 से 48 घंटों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

वाराणसी में बाढ़ का रौद्र रूप: मणिकर्णिका घाट डूबा, छतों और तंग गलियों में हो रहा शवदाह

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और पहाड़ों से छोड़े गए पानी के कारण वाराणसी (काशी) में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। इस विनाशकारी बाढ़ ने काशी के सबसे पवित्र महाश्मशान, मणिकर्णिका घाट, को पूरी तरह से जलमग्न कर दिया है। घाट के सभी शवदाह प्लेटफॉर्म पानी में डूब चुके हैं, जिससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हालात इतने संवेदनशील और हृदयविदारक हो चुके हैं कि अब मृतकों का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट की छतों, तंग गलियों और ऊंचे चबूतरे पर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जगह की कमी से शवदाह के लिए लंबी कतारें
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर मुख्य प्लेटफॉर्म डूबने के कारण जगह बेहद सीमित हो गई है। दूर-दराज के जिलों से अपनों के अंतिम संस्कार के लिए आ रहे शोक संतप्त परिवारों को अपनी बारी के लिए 6 से 8 घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। घाट की गलियों में पानी इस कदर भर चुका है कि शवों को नावों के जरिए छतों तक ले जाया जा रहा है।

टूट गया 84 घाटों का संपर्क, आरती का बदला स्थान
गंगा के उफान के कारण काशी के ऐतिहासिक 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया है। प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट के डूबने की वजह से विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती को अब घाट की छतों और ऊंचे होटलों के मंच पर शिफ्ट कर दिया गया है।

हजारों घरों में घुसा पानी, एनडीआरएफ मुस्तैद
गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी भी उफान पर है, जिससे तटीय इलाकों और रिहायशी कॉलोनियों में पानी भर गया है। लगभग 20,000 से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है और लोग सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गंगा में नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले 24 से 48 घंटों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

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