Tuesday, October 13, 2026

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NFHS-6 की रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में थमी नहीं बाल विवाह की कुप्रथा, हर 5वीं बेटी की उम्र से पहले हो रही शादी

NFHS-6 की रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में थमी नहीं बाल विवाह की कुप्रथा, हर 5वीं बेटी की उम्र से पहले हो रही शादी

विशेष ब्यूरो, भोपाल:
मध्य प्रदेश में महिला विकास और सुरक्षा के सरकारी दावों को आईना दिखाती एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के नए आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि सूबे में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई की जड़ें आज भी बेहद गहरी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में आज भी हर पांचवीं लड़की का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले ही कर दिया जाता है।

आगर मालवा और हरदा में सबसे गंभीर हालात
सर्वेक्षण के मुताबिक, बाल विवाह के मामलों में आगर मालवा जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष पर बना हुआ है। इसके अलावा हरदा जिले की स्थिति भी बेहद चिंताजनक पाई गई है। इन जिलों में प्रशासनिक चौकसी और जागरूकता अभियानों के बावजूद कम उम्र में शादियां धड़ल्ले से हो रही हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण अंचलों में यह समस्या ढाई गुना से भी ज्यादा गंभीर है।

पढ़ाई छूटने का बढ़ा ग्राफ
जल्दी शादी का सबसे सीधा और घातक असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, कम उम्र में विवाह के बंधन में बंधने के कारण महज 26 प्रतिशत लड़कियां ही दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर पा रही हैं। इसके बाद उनके स्कूल जाने पर पूरी तरह से रोक लग जाती है, जिससे उनका आत्मनिर्भर बनने का सपना अधूरा रह जाता है।

लड़के भी बन रहे कम उम्र में दूल्हा
इस रिपोर्ट का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब सिर्फ लड़कियां ही नहीं, बल्कि लड़के भी तय उम्र से पहले विवाह के जाल में फंस रहे हैं। मध्य प्रदेश में हर चौथा लड़का (लगभग 25 फीसदी) 21 साल की कानूनी उम्र पूरी करने से पहले ही दूल्हा बना दिया जाता है। लड़कों का यह आंकड़ा लड़कियों की तुलना में भी अधिक है, जो एक नए सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है।

सख्त धरातलीय कदमों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी कानूनों और विज्ञापनों के भरोसे बाल विवाह को रोकना मुमकिन नहीं है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर कड़ी निगरानी, शादियों में शामिल होने वाले सेवा प्रदाताओं (जैसे टेंट, पंडित, हलवाई) की जवाबदेही तय करना और बेटियों की उच्च शिक्षा को सुलभ बनाना बेहद जरूरी है।

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