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पीथमपुर स्टील फैक्ट्री विवाद: प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट को 39 दिन में दोबारा खोलने पर हंगामा, हाई कोर्ट पहुंची जनता

प्रफुल्ल तवर

पीथमपुर स्टील फैक्ट्री विवाद: प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट को 39 दिन में दोबारा खोलने पर हंगामा, हाई कोर्ट पहुंची जनता

विशेष ब्यूरो, इंदौर (28 अगस्त 2026):
मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर (धार) में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के एक फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहरीला धुआं और धूल उड़ाने के कारण जिस स्टील फैक्ट्री को प्रशासन ने ताला जड़ दिया था, उसे महज 39 दिन के भीतर दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी गई। इस हैरान करने वाले फैसले के खिलाफ अब स्थानीय लोगों और पड़ोसी उद्योगों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला?
पीथमपुर सेक्टर-3 में स्थित इस इंडक्शन फर्नेस स्टील यूनिट में अप्रैल 2024 से उत्पादन शुरू हुआ था। शुरुआत से ही इस फैक्ट्री से बड़े पैमाने पर फ्यूजिटिव एमिशन (जहरीला धुआं और सूक्ष्म कण) निकल रहा था, जिससे आसपास काम करने वाले कर्मचारियों की सेहत बिगड़ने लगी। इतना ही नहीं, पड़ोसी फैक्ट्रियों में बनने वाले ग्रीस और अन्य उत्पाद भी इस काली धूल की वजह से खराब होने लगे।

निरीक्षण में खुली पोल, 8 मई को लगा ताला
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने अप्रैल में दो बार फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि फैक्ट्री बिना किसी अनिवार्य ‘फ्यूम एक्सट्रैक्शन सिस्टम’ (धुआं सोखने वाली मशीन) के ही चलाई जा रही थी। नियमों की धज्जियां उड़ते देख बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया और 8 मई को वायु अधिनियम की धारा 31ए के तहत क्लोजर ऑर्डर जारी कर फैक्ट्री को बंद करा दिया और उसकी बिजली भी काट दी।

₹17.62 लाख की बैंक गारंटी पर 39 दिन में मिली ‘माफी’
विवाद तब शुरू हुआ जब बंद होने के महज 39 दिन बाद यानी 16 जून को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने एक नया आदेश जारी कर दिया। बोर्ड ने क्लोजर ऑर्डर को वापस लेते हुए फैक्ट्री को दोबारा चालू करने की अनुमति दे दी। इसके बदले प्रबंधन से सिर्फ ₹17.62 लाख की बैंक गारंटी ली गई और प्रदूषण उपकरण ठीक करने के लिए समय दे दिया गया।

हाई कोर्ट में याचिका: ‘बैंक गारंटी प्रदूषण का इलाज नहीं’
बोर्ड के इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध की आग भड़क गई है। याचिकाकर्ताओं ने एडवोकेट अभिनव पी. धनोतकर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह कदम पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। केवल बैंक गारंटी जमा करवा लेना प्रदूषण का विकल्प नहीं हो सकता। जब तक फैक्ट्री में प्रदूषण रोकने के पुख्ता इंतजाम जमीनी तौर पर पूरे नहीं हो जाते, तब तक इसकी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जानी चाहिए।


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