मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को लेकर चल रहे कानूनी और राजनीतिक घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आमंत्रण पर मुख्यमंत्री निवास (CM House) में ओबीसी महासभा (OBC Mahasabha) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मैराथन बैठक संपन्न हुई है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 27% आरक्षण को निरस्त कर पुराने 14% को बहाल करने और 13% होल्ड पदों को अनारक्षित वर्ग (UR) से भरने के आए फैसले के बाद पैदा हुए हालातों पर गंभीर मंथन हुआ।
प्रतिनिधिमंडल की दो टूक: “13% होल्ड उम्मीदवारों का भविष्य अधर में न लटकाएं”
बैठक के दौरान ओबीसी महासभा के कोर कमेटी सदस्यों और प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने पुरजोर तरीके से मांग रखी कि विगत कई वर्षों से अलग-अलग सरकारी भर्तियों (जैसे MPPSC और शिक्षक भर्ती) में होल्ड किए गए 13% पदों के ओबीसी कैंडिडेट्स को सरकार त्वरित राहत दे।
ओबीसी महासभा के नेताओं ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को पास करने के बावजूद हजारों ओबीसी युवा कोर्ट-कचहरी और होल्ड के चक्कर में मानसिक तनाव झेल रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सरकार इन 13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से अतिरिक्त पद बढ़ाकर (Supernumerary Posts) भर्ती प्रक्रिया पूरी करे ताकि किसी भी वर्ग का नुकसान न हो और प्रभावित उम्मीदवारों को तुरंत सरकारी सेवा में आने का मौका मिल सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आश्वासन और सरकारी रणनीति
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार पिछड़े वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार इस पूरे मामले में शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है और हाल ही में दिल्ली में सॉलिटिसर जनरल से मिलकर कानूनी विकल्पों पर भी चर्चा की गई है।
सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की तैयारी कर ली गई है और जल्द ही इस पर बड़ी कानूनी कार्रवाई दिखेगी।
महासभा की चेतावनी: “आंदोलन अभी थमेगा नहीं”
सीएम हाउस में हुई इस सकारात्मक चर्चा के बावजूद ओबीसी महासभा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने अधिकारों की पूर्ण बहाली तक संघर्ष की राह नहीं छोड़ेंगे। बैठक के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने दोहराया कि उनका चरणबद्ध महा-आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि 27% आरक्षण को लेकर कोई पुख्ता अध्यादेश या स्थाई राहत जमीन पर लागू नहीं हो जाती।
मुख्य रूप से विवाद का कारण हाई कोर्ट द्वारा सरकारी भर्तियों में 27% ओबीसी आरक्षण को खारिज कर 14% बहाल करने का आदेश है। इसके जवाब में सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की रणनीति बना रही है, वहीं दूसरी ओर संगठन की तरफ से मांगें पूरी होने तक चरणबद्ध आंदोलन को जारी रखने का साफ ऐलान कर दिया गया है।


