नेपाल और तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ (Flash Flood) ने भीषण तबाही मचाई है। भोटेकोशी (लेन्दे खोला) नदी में आई इस अचानक बाढ़ से पहले पहाड़ों पर भारी भूस्खलन हुआ, जिससे दूर-दूर तक धूल और धुएं का विशाल गुबार उड़ता दिखाई दिया। इसके ठीक बाद आए पानी के प्रचंड वेग ने रसुवागढ़ी, टिमुरे और आसपास के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया।
नेपाल की बाढ़ और तबाही के 4 खौफनाक पहलू
1. पहाड़ों से उठा धूल का गुबार और लैंडस्लाइड:
पहाड़ों की ढलानों से अचानक भारी मात्रा में चट्टानें और मलबा खिसकने से चारों तरफ धूल और धुएं जैसा गहरा गुबार छा गया। इस भूस्खलन के तुरंत बाद नदी का प्रवाह अचानक रुक गया और फिर सैलाब बनकर नीचे की बस्तियों पर टूट पड़ा।
2. नेपाल-चीन को जोड़ने वाला पक्का पुल तबाह:
उफनती नदी के तेज बहाव में रसुवागढ़ी स्थित नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मुख्य रणनीतिक और पक्का पुल तिनके की तरह बह गया। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सीमा संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है।
3. टिमुरे बाजार, पुलिस चौकियां और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बहे:
अचानक आए सैलाब ने टिमुरे बाजार क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी स्थित तीन नेपाल पुलिस चौकियां, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, कस्टम यार्ड और वहां खड़े दर्जनों ट्रक व गाड़ियां बाढ़ के पानी में समा गईं।
4. काठमांडू से चार जिलों का संपर्क कटा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी:
मुख्य सड़कों और पुलों के बह जाने से काठमांडू का रसुवा, नुवाकोट, धादिङ और चितवन से जमीनी संपर्क टूट गया है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से बड़े पैमाने पर एयर-रेस्क्यू और राहत अभियान चलाया जा रहा है।
तिब्बत की ओर से अचानक क्यों आया पानी?
प्रारंभिक रिपोर्टों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह तबाही मूसलाधार बारिश से ज्यादा तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता रुकने (Landslide Dam) या ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की वजह से हुई है। नदी का प्राकृतिक बहाव अचानक खुलने से लाखों क्यूसेक पानी एक साथ नीचे की ओर बढ़ा, जिससे निचले इलाकों के लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
रसुवा, नुवाकोट और चितवन समेत 5 जिलों के तटीय क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।


