नई दिल्ली:
देश के रियल एस्टेट सेक्टर से प्रॉपर्टी खरीदारों और निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। हाल ही में जारी प्रमुख एनरॉक (Anarock) और कशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रमुख 7 बड़े शहरों में जमीनों की कीमतों (Land Values) में 50% से लेकर 120% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस रियल्टी बूम में सबसे ज्यादा उछाल दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और बेंगलुरु (Bengaluru) जैसे शहरों में देखने को मिला है, जहाँ जमीन के दाम क्रमशः 70% से 130% और 60% से 120% तक बढ़ गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नई कनेक्टिविटी और बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क के चलते इन मुख्य कॉरिडोर्स में प्रोजेक्ट लॉन्च होने से पहले ही जमीनें बेहद महंगी हो चुकी हैं।
खबर की 3 सबसे बड़ी बातें:
- कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में 34% की तेजी: जमीन के अलावा घर बनाना भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे वैश्विक तनाव और स्टील, सीमेंट और फ्यूल (लॉजिस्टिक्स) की बढ़ती कीमतों के कारण रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में करीब 34% की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका सीधा असर मकानों की अंतिम कीमतों पर पड़ रहा है।
- प्राइवेट क्रेडिट और डिफॉल्ट का रिस्क: ईवाई (EY) की एक नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली छमाही में रियल एस्टेट सेक्टर भारत में प्राइवेट क्रेडिट (निजी कर्ज) जुटाने वाला सबसे बड़ा सेक्टर (35% हिस्सेदारी) बनकर उभरा है। हालांकि, रिपोर्ट ने आगाह भी किया है कि भारी कर्ज और प्रोजेक्ट्स में देरी की वजह से लेंडर्स अब काफी चुनिंदा हो रहे हैं, क्योंकि इस सेक्टर में डिफॉल्ट का जोखिम भी सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
- लक्जरी और सेकंड होम्स की भारी डिमांड: प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने के बावजूद प्रीमियम और लक्जरी घरों की मांग रिकॉर्ड तोड़ रही है। चेन्नई में आयोजित हुए हालिया प्रॉपर्टी एक्सपो के आंकड़ों के मुताबिक, 30 से 40 वर्ष की उम्र के युवा और एनआरआई (NRIs) लाइफस्टाइल अपग्रेड करने के लिए शहरों में सेकंड होम्स और फार्महाउस प्लॉट्स में भारी निवेश कर रहे हैं।
घर खरीदारों के लिए क्या है इसका मतलब?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जमीन अधिग्रहण की ऊंची लागत और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की महंगाई के कारण आने वाले दिनों में अफोर्डेबल (किफायती) हाउसिंग सेगमेंट पर दबाव बढ़ेगा, जिससे नए फ्लैट्स और प्लॉट्स की कीमतें और बढ़ सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ, प्रणीत कंस्ट्रक्शंस जैसे कुछ बड़े डेवलपर्स के आगामी आईपीओ (IPO) के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में प्रोजेक्ट देरी और कैश फ्लो की दिक्कतों का भी जिक्र सामने आया है, जो खरीदारों को सोच-समझकर निवेश करने की चेतावनी देता है।


