Wednesday, October 21, 2026

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आज के बड़े राजनीतिक बयान: सिद्धारमैया के 75% आरक्षण की मांग पर गरमाई सियासत, मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक दिग्गजों के तीखे बोल

आज के बड़े राजनीतिक बयान: सिद्धारमैया, राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं ने बढ़ाई देश की सियासी तपिश

नई दिल्ली:
भारतीय राजनीति में बयानों का दौर हमेशा गर्म रहता है, लेकिन आज का दिन देश की सियासत के लिए बेहद खास रहा। आरक्षण की सीमा बढ़ाने से लेकर दिल्ली में हुए प्रशासनिक हादसों पर पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों ने खुलकर अपनी बात रखी। देश की राजनीति को गरमाने वाले आज के सबसे बड़े और प्रमुख राजनीतिक बयान पढ़िए

नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री)
“मैंने लाल किले की प्राचीर से ‘दिमागी नक्सल’ (Ar urban Naxals) शब्द का इस्तेमाल किया था, जिस पर कुछ लोगों को बहुत मिर्ची लगी थी। यह एक होम्योपैथिक गोली की तरह है। जैसे होम्योपैथी की छोटी सी गोली शुरू में बीमारी को थोड़ा उभारती है और फिर उसका जड़ से इलाज करती है, वैसे ही मेरी इस होम्योपैथी गोली का असर अब दिखने लगा है। इसके बाद सारे दिमागी नक्सल एक-एक करके खुद ही बाहर आ रहे हैं और देश की जनता के सामने उनका असली चेहरा उजागर हो रहा है। विपक्ष के कुछ लोग देश के विकास पर सिर्फ ‘नाराज फूफा’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”

1. सिद्धारमैया (कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता)
“यदि देश में सभी वंचितों को सही मायने में सामाजिक न्याय देना है, तो आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 75 प्रतिशत कर दिया जाना चाहिए। दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार मिलना ही चाहिए। साथ ही, पूर्व में कराए गए सामाजिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण (जाति जनगणना) की रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक कर लागू किया जाए।”

2. राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष)
“दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों के हॉस्टल की इमारत गिरना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का नतीजा है। सरकार और स्थानीय प्रशासन युवाओं और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

3. मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष)
“केंद्र सरकार आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में डिजिटल जनगणना कराने की बात कर रही है, लेकिन हमारा रुख साफ है कि बिना व्यापक और जमीनी स्तर की ‘जातिगत जनगणना’ (Caste Census) के देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसका हक नहीं दिया जा सकता। सरकार को चुनावी फायदे से ऊपर उठकर नीति बनानी चाहिए।”

4. संजय सिंह (आम आदमी पार्टी सांसद)
“दिल्ली में एमसीडी और पुलिस लगातार उन अवैध और खतरनाक निर्माणों पर नजर रख रही है, जो लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। सत्य निकेतन हादसे के पीछे जो भी बिल्डर या मकान मालिक जिम्मेदार है, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। विपक्ष इस दुखद घड़ी में राजनीति करने के बजाय राहत कार्य में सहयोग करे।”

5. जेपी नड्डा (भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री)
“हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर काम कर रही है। जब विपक्ष को विकास के मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं मिलता, तो वे जाति और तुष्टिकरण की राजनीति के सहारे समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। देश की जनता अब इस विभाजनकारी राजनीति को पूरी तरह समझ चुकी है।”

6. डॉ. मोहन यादव (मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश)
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जनकल्याण और देश की आर्थिक प्रगति के अभियानों को मध्य प्रदेश में जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जा रहा है। हमारी सरकार केवल बड़ी योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि फिजूलखर्ची रोकने और सरकारी खर्च घटाने की दिशा में भी गंभीर कदम उठा रही है। मध्य प्रदेश का चौमुखी विकास ही हमारी एकमात्र प्राथमिकता है और हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं।”

7. दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद, मध्य प्रदेश)
“विपक्ष केवल जनता को बांटने वाले मुद्दों को तूल देने में जुटा रहता है, जबकि असल मुद्दे बेरोजगारी और कानून व्यवस्था के हैं। हमारा रुख स्पष्ट है कि कानून का उल्लंघन करने वाले या समाज में शांति भंग करने वाले किसी भी हुड़दंगी या उपद्रवी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार को किसी भी संगठन पर दिखावे के प्रतिबंध लगाने के बजाय जमीनी स्तर पर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।”


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