‘द ब्लैक डाहलिया‘—हॉलीवुड का वो खौफनाक हत्याकांड, जिसका कातिल 80 साल से पुलिस को चिढ़ा रहा है
क्राइम डेस्क, NTV TIME:
चमचमाती रोशनी, ऊँची इमारतें और स्टार बनने का सपना लेकर हॉलीवुड आने वाले लाखों चेहरे। लेकिन साल 1947 में इसी हॉलीवुड की गलियों से एक ऐसी खौफनाक दास्तां सामने आई, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। यह कहानी है ‘द ब्लैक डाहलिया’ (The Black Dahlia) मर्डर केस की। अमेरिकी इतिहास का सबसे क्रूर, सबसे रहस्यमयी और आज तक अनसुलझा हत्याकांड, जिसके मुकम्मल सबूत आज भी पुलिस के पास नहीं हैं।
1. 15 जनवरी 1947 की वो सर्द सुबह: मैनिक्विन या लाश?
लॉस एंजिल्स के लेमर्ट पार्क इलाके में हर रोज की तरह सुबह की चहल-पहल शुरू हो रही थी। एक महिला अपनी छोटी बेटी का हाथ पकड़े फुटपाथ से गुजर रही थी। तभी उसकी नजर सड़क किनारे खाली पड़े एक प्लॉट पर पड़ी। हरी घास के बीच एक सफेद रंग की आकृति पड़ी थी। दूर से देखने पर ऐसा लगा कि किसी कपड़े की दुकान का कोई प्लास्टिक का पुतला (Mannequin) वहां फेंक दिया गया है।
कौतूहलवश वो महिला जैसे ही उस आकृति के करीब पहुंची, उसकी चीख निकल गई। दिल दहल देने वाला वो मंजर देखकर उसने अपनी बेटी की आँखें बंद कर लीं। वह कोई पुतला नहीं, बल्कि एक इंसानी लाश थी। एक युवा लड़की की लाश, जिसे बीच से बेरहमी से काट कर दो टुकड़ों में अलग कर दिया गया था।
2. कौन थी वो बदनसीब लड़की?
पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो उंगलियों के निशान (Fingerprints) से मृतका की पहचान हुई। उसका नाम था एलिजाबेथ शॉट (Elizabeth Short), उम्र महज 22 साल। एलिजाबेथ मैसाचुसेट्स की रहने वाली थी, लेकिन उसकी आँखों में हॉलीवुड की बड़ी स्क्रीन पर छा जाने का सपना था। वह एक्ट्रेस बनने के लिए लॉस एंजिल्स आई थी, लेकिन बदकिस्मती से उसे काम नहीं मिल रहा था और वह पैसों की तंगी से जूझ रही थी। उसे आखिरी बार 9 जनवरी 1947 को लॉस एंजिल्स के ‘मिलेनियम बिल्टमोर होटल’ की लॉबी में देखा गया था। उसके बाद वो सीधे 15 जनवरी को इस हालत में मिली।
3. कातिल की दरिंदगी: जिसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए
जब फॉरेंसिक टीम और जासूसों ने लाश का मुआयना किया, तो वह नजारा किसी हॉरर फिल्म से भी ज्यादा भयानक था:
- खून की एक बूंद भी नहीं: सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि एलिजाबेथ के शरीर में खून का एक कतरा भी नहीं बचा था। उसे पूरी तरह से ‘ड्रेन’ (खाली) किया गया था। यही नहीं, घटनास्थल पर भी खून का एक भी दाग नहीं था। साफ था कि मर्डर कहीं और किया गया और लाश को नहला-धुलाकर बिल्कुल साफ करके यहाँ फेंका गया।
- ग्लासगो स्माइल (Glasgow Smile): कातिल ने एलिजाबेथ के चेहरे पर चाकू से दोनों कोनों से कानों तक गहरा चीरा लगा दिया था। यह एक ऐसी डरावनी बनावटी मुस्कान थी, जिसे देखकर जासूसों की रूह कांप गई।
- सर्जिकल कट्स (Hemicorporectomy): एलिजाबेथ के शरीर को नाभि के ठीक नीचे से रीढ़ की हड्डी के जोड़ों के बीच से काटा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह कोई आम इंसान या पागल हत्यारा नहीं कर सकता था। यह काम इतनी सफाई से किया गया था, जिसे सिर्फ कोई ट्रेनर सर्जन या मेडिकल का छात्र ही अंजाम दे सकता था।
4. मीडिया का नाम और कातिल की खुली चुनौती
इस मर्डर मिस्ट्री ने रातों-रात अखबारों की सुर्खियां बटोर लीं। एलिजाबेथ को हमेशा काले रंग के कपड़े पहनने का शौक था और उस दौर में ‘द ब्लू डाहलिया’ नाम की फिल्म मशहूर थी। इसी को जोड़कर मीडिया ने उसे नाम दिया—‘द ब्लैक डाहलिया‘।
पुलिस अभी अंधेरे में तीर चला ही रही थी कि मर्डर के 9 दिन बाद, 24 जनवरी 1947 को लॉस एंजिल्स अखबार के दफ्तर में एक रहस्यमयी लिफाफा आया। इस लिफाफे पर अखबार के कटे हुए अक्षरों को चिपकाकर लिखा था—“यह डाहलिया का सामान है, अगली चिट्ठी जल्द आएगी।”
जब पुलिस ने लिफाफा खोला, तो उसके होश उड़ गए। अंदर एलिजाबेथ का असली बर्थ सर्टिफिकेट, उसकी तस्वीरें, उसके दोस्तों के नाम और उसकी पर्सनल डायरी थी। कातिल कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने इन सभी चीजों को पेट्रोल से धोया था ताकि उस पर उंगलियों के निशान (Fingerprints) या कोई डीएनए सुराग न छूट सके।
5. 150 संदिग्ध और वो एक रईस डॉक्टर
लॉस एंजिल्स पुलिस (LAPD) ने इस केस को सुलझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। FBI को भी शामिल किया गया। लगभग 150 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ हुई। कई लोगों ने सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए खुद को कातिल बताया, लेकिन पुलिस की जांच में वो झूठे निकले।
सालों बाद, इस केस में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया, जब उंगली उठी शहर के एक मशहूर और बेहद रईस डॉक्टर जॉर्ज होडेल (Dr. George Hodel) पर।
- मेडिकल बैकग्राउंड: डॉ. जॉर्ज होडेल के पास वो सर्जिकल स्किल थी, जिससे लाश को दो हिस्सों में काटा जा सकता था।
- खुफिया टेप का सच: साल 1950 में पुलिस ने डॉ. होडेल पर शक होने के कारण उसके घर में खुफिया माइक्रोफोन (Wiretaps) लगाए थे। एक रिकॉर्डिंग में डॉ. होडेल की आवाज कैद हुई, जिसमें वह हंसते हुए किसी से कह रहा था—“मान लो कि मैंने ब्लैक डाहलिया को मारा है। लेकिन वो अब इसे साबित नहीं कर सकते। मेरी सेक्रेटरी अब उन्हें कुछ नहीं बता सकती क्योंकि वो मर चुकी है।”
- कानून के हाथ रहे खाली: पुलिस जब तक पुख्ता सबूत जुटाकर डॉ. होडेल को गिरफ्तार कर पाती, वह रातों-रात अमेरिका छोड़कर फिलीपींस भाग गया। वह कभी वापस नहीं लौटा और साल 1999 में उसकी मौत हो गई।
आज भी अनसुलझा है राज
एलिजाबेथ शॉट उर्फ ‘द ब्लैक डाहलिया’ की मौत को आज 80 साल होने को आए हैं। लॉस एंजिल्स पुलिस की फाइलों में यह केस आज भी ‘ओपन’ (चालू) है। कातिल कौन था? उसने एलिजाबेथ को 9 जनवरी से 15 जनवरी के बीच कहाँ रखा था? और उसने इतनी बेरहमी क्यों की? इन सवालों के जवाब आज भी लॉस एंजिल्स की गलियों में दफन हैं।
