‘Toxic’ Movie Review: यश का खूंखार अंदाज और हॉलीवुड स्टाइल एक्शन, लेकिन क्या कहानी में है गहराई?
मनोरंजन डेस्क
‘KGF’ सीरीज के जरिए दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने वाले रॉकस्टार यश ने बड़े पर्दे पर एक बार फिर कदम रखा है। निर्देशक गीतू मोहनदास के साथ उनकी बहुचर्चित फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups’ बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है। भारी-भरकम बजट और जबरदस्त स्टारकास्ट के साथ आई यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है, आइए जानते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
‘टॉक्सिक’ की कहानी मुख्य रूप से एक काल्पनिक अंडरवर्ल्ड और माफिया साम्राज्य के ईर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसका एक बड़ा हिस्सा तटीय इलाकों के ड्रग्स और अवैध कारोबार पर आधारित है। फिल्म में यश ‘राया’ नाम के एक ऐसे बेखौफ और रहस्यमयी शख्स के किरदार में हैं, जो अपने अतीत के पन्नों और माफिया की काली दुनिया के बीच फंसा हुआ है। कहानी केवल गुंडों की लड़ाई भर नहीं है, बल्कि इसमें एक डार्क-फेयरीटेल का तड़का लगाते हुए पारिवारिक रिश्तों, धोखे और बदले को दिखाया गया है।
कैसा है कलाकारों का प्रदर्शन?
यश: पूरी फिल्म पूरी तरह से यश के कंधों पर टिकी है। उनका नया रेट्रो लुक, सिगार पीने का अंदाज और एक्शन सीन में उनका एटीट्यूड दर्शकों को बांधे रखता है। ‘KGF’ के रॉकी भाई के बाद इस नए अवतार में भी उनका दबदबा साफ नजर आता है।
महिला किरदार: नयनतारा, कियारा आडवाणी और हुमा कुरैशी जैसे बड़े नामों की मौजूदगी फिल्म को एक ग्लोबल अपील देती है। हालांकि, इतने बड़े सितारों के बीच हर किरदार को स्क्रीन पर उतना वक्त नहीं मिल पाया है जितनी उम्मीद की जा रही थी। फिर भी, नयनतारा और कियारा के सीन फिल्म को मजबूती देते हैं।
डायरेक्शन और टेक्निकल साइड
गीतू मोहनदास का निर्देशन लीक से हटकर है। उन्होंने भारतीय मास-सिनेमा में हॉलीवुड स्टाइल का ‘डार्क टोन’ (Noir look) देने की कोशिश की है।
विजुअल्स और सिनेमैटोग्राफी: फिल्म का कैमरा वर्क और कलर टोन बेहद शानदार है। हर फ्रेम किसी कैनवास की तरह नजर आता है।
एक्शन और बीजीएम (BGM): फिल्म के एक्शन सीक्वेंस काफी रॉ (Raw) और हिंसक हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की डार्क थीम के साथ पूरी तरह मेल खाता है और थ्रिल को बनाए रखता है।
सकारात्मक और नकारात्मक पहलू
प्लस पॉइंट्स: यश का स्क्रीन प्रेजेंस, हॉलीवुड स्तर के विजुअल्स, जबरदस्त एक्शन और अनोखा ट्रीटमेंट।
माइनस पॉइंट्स: सेकंड हाफ में कहानी का धीमा पड़ना और जरूरत से ज्यादा वॉयलेंस (अति-हिंसा)। कुछ जगहों पर स्क्रीनप्ले थोड़ा पेचीदा हो जाता है, जिससे आम दर्शकों का जुड़ाव कम हो सकता है।
‘Toxic’ केवल एक साधारण एक्शन-मसाला फिल्म नहीं है, बल्कि यह डार्क ड्रामा और स्टाइलिश मास-सिनेमा का अनूठा मिश्रण है। अगर आप यश के फैन हैं और बड़े पर्दे पर इंटरनेशनल लेवल के एक्शन और विजुअल्स देखने के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक (One Time Watch) जरूर है।
रेटिंग: 3.5/5 स्टार


