संयुक्त राष्ट्र (UN) में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके आतंकी संगठन ‘डी-कंपनी’ को लेकर पेश की गई एक विवादित रिपोर्ट पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक के दौरान भारतीय राजनयिक ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से भ्रामक और जमीनी हकीकत से परे बताते हुए खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
मानवाधिकार और आतंकवाद विरोध पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) बेन शाऊल (Ben Saul) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाली ‘डी-कंपनी’ को “भारत आधारित” (India-based) आपराधिक गिरोह के रूप में परिभाषित कर दिया। रिपोर्ट में इस बात का बिल्कुल भी जिक्र नहीं किया गया कि दाऊद इब्राहिम दशकों पहले भारत से भाग चुका है और पड़ोसी देश पाकिस्तान में शरण लिए हुए है।
भारत ने UN में दिया करारा जवाब
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी (Raghoo Puri) ने इस ऐतिहासिक चूक पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा:
- तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया: दाऊद इब्राहिम और उसका संगठन 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद से ही भारत में मोस्ट वांटेड हैं। 2003 में जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के लिए वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था, तब वह भारत से बाहर रहकर अपनी गतिविधियां चला रहा था।
- पाकिस्तान में छिपा है दाऊद: भारतीय राजनयिक ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि यूएन की आधिकारिक लिस्टिंग के मुताबिक दाऊद इब्राहिम आज उसी देश में सुरक्षित रह रहा है जहाँ अमेरिकी सेना ने ओसामा बिन लादेन को खोजकर ढेर किया था। ऐसे में इसे ‘भारतीय गिरोह’ बताना संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को गंभीर चोट पहुँचाता है।
रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी पर चीनी फंडिंग का आरोप
इस विवाद के बीच संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर नजर रखने वाली एक गैर-सरकारी संस्था ‘यूएन वॉच’ (UN Watch) ने रिपोर्ट के लेखक बेन शाऊल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है।
- संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सरकार ने वर्ष 2024 में बेन शाऊल को $150,000 (करीब 1.42 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था।
- इस खुलासे के बाद चीन को बेन शाऊल का सबसे बड़ा वित्तीय मददगार बताया जा रहा है, जिससे इस बात की आशंका बढ़ गई है कि भारत की छवि खराब करने और आतंकवाद के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए इस भ्रामक रिपोर्ट को तैयार किया गया।
आतंकवाद को ढाल बनाने की कोशिश
भारत ने साफ किया है कि कुछ देश अपने यहाँ पल रहे आतंकवाद को सही ठहराने के लिए मानवाधिकारों की आड़ लेते हैं। राजनयिक रघु पुरी ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने और उग्रवाद फैलाने वालों को मानवाधिकारों के बहाने बिल्कुल भी सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।


