भारत के सांस्कृतिक गौरव में इजाफा: UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में 5 नई साइट्स शामिल, अकेले मध्य प्रदेश से हैं ये 4 ऐतिहासिक धरोहरें
नई दिल्ली / भोपाल:
भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के लिए एक और बड़ी और गर्व की बात सामने आई है। यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहरों की अस्थायी (Tentative) सूची में भारत की 5 नई साइट्स and प्रस्तावों को शामिल किया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही अब भारत की टेंटेटिव लिस्ट में कुल धरोहरों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। इस नए अपडेट की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इन 5 नई प्रविष्टियों में से 4 स्थल अकेले मध्य प्रदेश से हैं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की नोडल एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मध्य प्रदेश पर्यटन (MP Tourism) के संयुक्त प्रयासों से मिली इस वैश्विक पहचान पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश व प्रदेश वासियों को बधाई दी है।
मध्य प्रदेश की ये 4 अनमोल धरोहरें हुईं शामिल
टेंटेटिव सूची में आने के बाद अब मध्य प्रदेश में यूनेस्को की संभावित धरोहरों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। आइए जानते हैं उन 4 साइट्स के बारे में जिन्होंने इस बार वैश्विक मंच पर जगह बनाई है:
1. उदयगिरि गुफाएं (विदिशा)
- महत्व: बेतवा और धसन नदियों के बीच स्थित उदयगिरि में पत्थरों को काटकर बनाई गई 20 प्राचीन गुफाएं हैं।
- इतिहास: यह गुप्तकालीन (4थी-5वीं शताब्दी ईस्वी) धार्मिक और राजसत्तात्मक कला का सबसे बेहतरीन जीवित उदाहरण है। यहाँ की विशाल और प्रसिद्ध वराह प्रतिमा वैष्णव परंपरा और तत्कालीन मूर्तिकला की बेजोड़ मिसाल है।
2. चंबल घाटी के मंदिर समूह / बटेश्वर (मुरैना)
- महत्व: इस प्रविष्टि के तहत चंबल क्षेत्र के बटेश्वर, पदावली और ककनमठ के मंदिर समूहों को शामिल किया गया है।
- इतिहास: मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच निर्मित ये मंदिर नागर शैली की वास्तुकला को दर्शाते हैं। अकेले बटेश्वर में 200 से अधिक छोटे-बड़े प्राचीन मंदिरों का एक अद्भुत क्लस्टर है, जिसे ‘ड्राय-स्टोन मैसनरी’ (सूखी चिनाई) तकनीक से पुनर्निर्मित किया गया है।
3. गिन्नौरगढ़ किला (सीहोर)
- महत्व: भोपाल के पास रातापानी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के घने जंगलों के बीच एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह किला आदिवासी साम्राज्य की भव्यता का प्रतीक है।
- इतिहास: यह पूर्व राज गोंड शासकों की एक अभेद्य और मजबूत राजनीतिक राजधानी हुआ करता था। यह किला अपनी रणनीतिक सुरक्षा, मजबूत वास्तुकला, 4 झीलों और 65 सीढ़ीदार कुओं (बावड़ियों) वाली प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली के लिए खास तौर पर जाना जाता है।
4. बाघ गुफा चित्रकारी (धार)
- महत्व: विंध्याचल की पहाड़ियों में बाघनी नदी के किनारे स्थित यह 9 बौद्ध रॉक-कट (पाषाण-कृत) गुफाओं का एक ऐतिहासिक समूह है।
- इतिहास: मुख्य रूप से 4थी से 6ठी शताब्दी ईस्वी की इन गुफाओं का सबसे बड़ा आकर्षण इसके प्राचीन भित्ति चित्र (Murals) हैं। गुफा संख्या 4 (रंग महल) के चित्र तत्कालीन शाही दरबारों, संगीतकारों, नर्तकों और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं, जिनकी कलात्मक तकनीक अजंता की गुफाओं से मेल खाती है।
5वीं एंट्री: भारत और दक्षिण अफ्रीका का संयुक्त ‘सत्याग्रह’ प्रस्ताव
इस सूची में शामिल होने वाली 5वीं प्रविष्टि एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसनेशनल (Transnational) प्रस्ताव है, जिसका नाम ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ (Sites of Satyagraha) है। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका का एक संयुक्त प्रोजेक्ट है। इसमें महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ शुरू हुए शुरुआती आंदोलन (जैसे पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन और फोनिक्स सेटलमेंट) से लेकर भारत वापसी के बाद साबरमती आश्रम, सेवाग्राम आश्रम, मणि भवन और आगा खान पैलेस जैसी ऐतिहासिक जगहों को शामिल किया गया है, जो दुनिया को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले सफर को बयां करती हैं।
क्या होती है ‘टेंटेटिव लिस्ट’ और इसके मायने?
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (संभावित सूची) किसी भी देश के उन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या प्राकृतिक स्थलों की एक आधिकारिक राष्ट्रीय सूची होती है, जिन्हें वह भविष्य में मुख्य ‘यूनेस्को विश्व धरोहर सूची’ (World Heritage List) में शामिल कराने के लिए पूरी डॉक्युमेंटेशन के साथ नामांकित करना चाहता है। किसी भी धरोहर को स्थाई वैश्विक दर्जा मिलने की दिशा में यह पहला और अनिवार्य कानूनी चरण होता है।
पर्यटन को मिलेगा बूस्ट:
मध्य प्रदेश में खजुराहो, भीमबेटका और सांची के स्तूप पहले से ही स्थाई विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Sites) घोषित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 4 नए स्थलों के टेंटेटिव लिस्ट में आने से मध्य प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण को नई गति मिलेगी।
