( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ संगीन जुर्म में जज द्वारा कैदियों को जेल भेजना तो हम बात है लेकिन इंदौर में पहली बार एक जज जेल के अंदर कैदियों को रामायण का सुंदरकांड सुना रहे हैं. खास बात यह है कि यह आयोजन जेल अधीक्षक ने किया है जहां कैदी अपराध से विमुख होने के लिए रामायण को आत्मसात कर रहे हैं. इंदौर की सेंट्रल जेल में कैदियों को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए अब बाकायदा रामायण और सुंदरकांड के उपदेश सुनाए जा रहे हैं.
जेल के अंदर कैदियों के बीच किया जा रहा सुंदरकांड का पाठ
दरअसल रिटायर्ड जज और आध्यात्मिक विद्वान श्री अरुण जी द्वारा इंदौर सेंट्रल जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे को संगीतमय व्याख्यान एवं सुंदरकांड के पाठ के आयोजन की पेशकश की गई तो उन्होंने इस आयोजन को तत्काल सहमति दे दी. इसके बाद जेल के अंदर सुंदरकांड के लिए बाकायदा शनिवार का दिन तय किया गया. उसके बाद जेल के अंदर ही आध्यात्मिक विद्वान अरुण जी के लिए बाकायदा व्यास गादी तैयार की गई.
दरअसल पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण जी को सुंदरकांड का पाठ करने में विशेष लगाव रहा है, जिन्हें इस क्षेत्र के कई पुरस्कार भी मिले हैं. जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे ने बताया कि वह अपने द्वारा किए गए इस आयोजन की कोई फीस चार्ज नहीं करते ना ही आने-जाने का कोई खर्च मांगते हैं. उनकी विशेष इच्छा थी इसलिए यह आयोजन किया गया. जिसके माध्यम से जेल के अंदर कैदियों को भी सुंदरकांड और धर्म की आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है.
कैदियों को धर्म एवं संस्कृति का महत्व बताया गया
इसके बाद सभी कैदियों को बाकायदा सुंदरकांड की पुस्तिकाएं दी गईं और इसी के साथ रामायण का सुंदरकांड शुरू हुआ. आयोजन के दौरान अरुण जी ने कैदियों को धर्म एवं संस्कृति का महत्व बताया. उन्होंने सभी से आध्यात्मिक और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा, बुरे कर्म का नतीजा बुरा ही होता है और कभी ना कभी उसकी सजा भुगतनी होती है. इसलिए धर्म और संस्कृति के रास्ते चलने का सद्कार्य ही जीवन जीने का समुचित मार्ग है जो हर किसी को आत्म शुद्धि और आत्म मंथन करने का अवसर देता है.
इस अवसर पर जेल सुपरिंटेंडेंट दिनेश नरगावे ने बताया इस संगीतमय आयोजन में 1500 से अधिक जेल के कैदियों के द्वारा सुंदरकांड के पाठ का श्रवण किया जा रहा है और इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहते हैं जिसमें कैदियों के भी मनोबल बढ़ाने एवं उनमें भी सद्बुद्धि आए और सत्य मार्ग पर चलें ऐसा हमारा प्रयास है.


