भारत-रूस डिफेंस डील: पुतिन के दौरे पर लग सकती है मुहर, वायुसेना को मिलेंगे घातक Su-57 और 100+ सुखोई होंगे अपग्रेडनई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगामी भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा गलियारों में एक बहुत बड़ी हलचल शुरू हो गई है। वैश्विक कूटनीति और सैन्य संतुलन को बदलने वाली इस संभावित डिफेंस डील के तहत भारतीय वायुसेना (IAF) को दुनिया का बेहद मारक 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट ‘सुखोई-57’ (Su-57) मिल सकता है। इसके साथ ही, भारत के पास मौजूद 100 से अधिक सुखोई-30MKI (Su-30MKI) लड़ाकू विमानों को भी ‘सुपर सुखोई’ में अपग्रेड करने का मेगा प्लान तैयार किया जा रहा है।
100 से ज्यादा सुखोई-30MKI बनेंगे ‘सुपर सुखोई’
डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, रूस के तकनीकी विशेषज्ञों (Technical Experts) की एक उच्चस्तरीय टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक यूनिट का गुप्त दौरा किया है।
- क्या होगा अपग्रेड: इन विमानों में नए जमाने के एडवांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सुइट्स, शक्तिशाली इंजन और आधुनिक मिसाइल सिस्टम फिट किए जाएंगे।
- बजट और दायरा: भारत पहले से ही लगभग ₹63,000 करोड़ की लागत से 84 सुखोई विमानों के स्वदेशी अपग्रेडेशन पर काम कर रहा है। अब पुतिन के दौरे में इस दायरे को बढ़ाकर 100 से अधिक विमानों तक ले जाने की तैयारी है।
भारत क्यों खरीदना चाहता है 5वीं पीढ़ी का Su-57?
भारतीय वायुसेना लंबे समय से 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट की कमी का सामना कर रही है। रूस ने भारत के सामने न सिर्फ Su-57 बेचने का बल्कि भारत में ही इसके ‘संयुक्त उत्पादन’ (Joint Production) और पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) का बड़ा ऑफर रखा है। भारत के लिए यह डील क्यों गेमचेंजर है, इसके तीन मुख्य कारण हैं:
- चीन-पाकिस्तान का गठजोड़: चीन के पास पहले से ही 5वीं पीढ़ी का J-20 स्टेल्थ फाइटर है, और वह पाकिस्तान को भी इस तकनीक से लैस करने की कोशिश में है। आसमान में संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को इस ताकत की तुरंत जरूरत है।
- स्वदेशी AMCA में समय: भारत अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) पर तेजी से काम कर रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह विकसित और वायुसेना में शामिल होने में 2032 तक का समय लग सकता है। सुखोई-57 इस बीच के खाली समय (Capability Gap) को भरने का सबसे सटीक जरिया है।
- कम पाबंदियों के साथ नई शुरुआत: भारत और रूस ने 2007 में संयुक्त रूप से FGFA प्रोजेक्ट शुरू किया था, लेकिन 2018 में तकनीकी मतभेदों के कारण भारत अलग हो गया था। अब रूस पुराने कड़वे अनुभवों को भुलाकर पूर्ण स्वामित्व और बिना किसी पश्चिमी पाबंदी के यह विमान ऑफर कर रहा है।
सुखोई-57 बनाम अमेरिकी F-35: कौन है आसमान का असली किंग?
रूस का सुखोई-57 अपनी उच्च गति (2,470 किमी/घंटा) और बेजोड़ पैंतरेबाजी (dogfight) क्षमता के साथ आमने-सामने की लड़ाई में F-35 को पछाड़ता है, जबकि अमेरिकी F-35 अपनी बेहतर स्टेल्थ तकनीक और उन्नत सेंसर नेटवर्क के कारण रडार से छिपने में आगे है। दोनों विमान 5वीं पीढ़ी के घातक स्टेल्थ विमान हैं, जिसमें Su-57 रफ़्तार में और F-35 तकनीक में श्रेष्ठ है।
कूटनीतिक दृष्टिकोण: पश्चिमी देशों की नजर
अगर पुतिन के इस दौरे पर यह मेगा डिफेंस डील फाइनल होती है, तो यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा संदेश होगा। रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपनी रक्षा जरूरतों को सर्वोपरि रखते हुए मॉस्को के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का संकल्प दिखा रहा है।


