Drishyam 3 Review: बॉलीवुड के सबसे मशहूर सस्पेंस-थ्रिलर फ्रेंचाइजी की आखिरी कड़ी ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन‘ (Drishyam 3) आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी इस फिल्म का दर्शकों को पिछले 4 सालों से बेसब्री से इंतजार था। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) की तारीख, पणजी (गोवा) की पुलिस, और विजय सलगांवकर (अजय देवगन) की चालाकी… क्या इस बार कानून जीतेगा या विजय? आइए पढ़ते हैं फिल्म का पूरा रिव्यू।
फिल्म की कहानी (Plot)
कहानी वहीं से शुरू होती है जहां ‘दृश्यम 2’ खत्म हुई थी। विजय सलगांवकर ने पिछले पार्ट में पुलिस की नाक के नीचे से कंकाल गायब कर दिया था, लेकिन कानून ने हार नहीं मानी है। इस बार पुलिस डिपार्टमेंट ने विजय को चारों तरफ से घेरने के लिए एक बेहद शातिर मास्टरप्लान तैयार किया है।
केस की कमान इस बार एक बेहद सख्त और तेज-तर्रार स्पेशल इनवेस्टिगेशन ऑफिसर (जयदीप अहलावत) को सौंपी गई है। जयदीप के पास विजय के परिवार के खिलाफ कुछ ऐसे पुख्ता सबूत हैं, जो सलगांवकर परिवार की नींव हिला देते हैं। वहीं, अपने बेटे सैम को न्याय दिलाने के लिए आईजी मीरा देशमुख (तबू) और महेश देशमुख (रजत कपूर) भी आखिरी बार पूरी ताकत झोंक देते हैं। क्या विजय इस बार भी 2 और 3 अक्टूबर की नई कहानी गढ़ पाएगा? यही फिल्म का मुख्य सस्पेंस है।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां (Strengths)
- अजय देवगन और जयदीप अहलावत का माइंड गेम: विजय सलगांवकर के किरदार में अजय देवगन की खामोशी और आंखों का अभिनय एक बार फिर जादू कर गया। वहीं, इस बार फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी जयदीप अहलावत हैं। एक कड़क पुलिस अफसर के रूप में उन्होंने अजय देवगन को स्क्रीन पर जो टक्कर दी है, उसे देखकर थियेटर में तालियां बज उठती हैं।
- अनपेक्षित क्लाइमैक्स (Unpredictable Climax): इस बार मेकर्स ने मलयालम ओरिजिनल फिल्म की कहानी का इंतजार न करके बिल्कुल फ्रेश स्क्रिप्ट लिखी है। फिल्म का आखिरी 30 मिनट का कोर्टरूम ड्रामा और क्लाइमैक्स ट्विस्ट इतना जबरदस्त है कि दर्शक दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। ऐसा ट्विस्ट जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
- सपोर्टिंग कास्ट का दमदार काम: तबू ने एक बेबस लेकिन जिद्दी मां के दर्द और गुस्से को बखूबी पर्दे पर उतारा है। वहीं, एडवोकेट के रूप में प्रकाश राज की एंट्री फिल्म में नया रोमांच लेकर आती है। पुराने किरदारों में इंस्पेक्टर गायतोंडे (कमलेश सावंत) का खौफनाक अंदाज कहानी को और मजबूत बनाता है।
- धमाकेदार बैकग्राउंड स्कोर (BGM): फिल्म में कोई फालतू गाना नहीं रखा गया है, जो थ्रिलर फिल्मों के लिए बहुत अच्छी बात है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस वाले दृश्यों में दर्शकों की धड़कनें बढ़ाने का काम करता है।
कहां रह गई थोड़ी कमी? (Weakness)
- धीमी शुरुआत (Slow First Half): फिल्म का पहला हाफ थोड़ा धीमा महसूस होता है। डायरेक्टर ने पुराने सबूतों को जोड़ने और नए केस की फाइलें खोलने में काफी समय लिया है। हालांकि, इंटरवल के बाद फिल्म इतनी तेज रफ्तार पकड़ती है कि आपको पलक झपकाने का मौका भी नहीं मिलता।
‘दृश्यम 3‘ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सस्पेंस थ्रिलर सिनेमा की एक मास्टरक्लास है। यह फ्रेंचाइजी का एक बेहद शानदार और संतोषजनक अंत (Conclusion) है। अगर आप अजय देवगन के फैन हैं और आपको दिमागी कसरत वाली फिल्में पसंद हैं, तो इस वीकेंड ‘दृश्यम 3’ देखने सिनेमाघरों में जरूर जाएं।
- रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐✨ (4.5/5 स्टार्स)
- वन-लाइन रिव्यू: विजय सलगांवकर का आखिरी और सबसे खतरनाक दांव, जिसे मिस करना बड़ी भूल होगी!


