हाईवे की ‘जगमगाती लाइटें’ बनीं आफत: सोयाबीन की फसलें हुई ‘बांझ’, किसानों पर टूटा अनोखा संकट
विशेष रिपोर्ट:
मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ और मध्य क्षेत्रों के किसानों पर इस बार एक बेहद अजीब और अनोखा संकट मंडरा रहा है। आमतौर पर विकास की निशानी मानी जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) की जगमगाती स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें अब किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही हैं। फोरलेन और एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसलें ‘अफलन’ यानी बांझपन का शिकार हो रही हैं, जिससे किसानों की रातों की नींद उड़ गई है।
कृषि वैज्ञानिकों की शुरुआती जांच में सामने आया है कि सड़कों पर रातभर जलने वाली इन हाई-वोल्टेज एलईडी (LED) लाइटों के कारण सोयाबीन के पौधों की बायोलॉजिकल क्लॉक (जैविक घड़ी) पूरी तरह बिगड़ गई है।
क्या है ‘बांझपन’ का वैज्ञानिक कारण?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सोयाबीन एक ‘शॉर्ट-डे’ (Short-day) फसल है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस फसल में फल और फूल आने के लिए रात के समय लंबे समय तक घाना अंधेरा होना बेहद जरूरी होता है।
हाइवे के किनारे लगे हाई-मास्ट पोल और स्मार्ट लाइटों के कारण खेतों में रात के समय भी दिन जैसा उजाला रहता है। इस ‘प्रकाश प्रदूषण’ (Light Pollution) की वजह से पौधों को लगता है कि अभी दिन ही चल रहा है। नतीजा यह हो रहा है कि पौधे लंबाई में तो खूब बढ़ रहे हैं और उनमें पत्तियां भी हरी-भरी हैं, लेकिन उनके भीतर फलियां (दाना) नहीं बन पा रही हैं। किसान इस स्थिति को स्थानीय भाषा में फसल का ‘बांझ’ होना कह रहे हैं।
सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित, मुआवजे की मांग
हाईवे से सटे लगभग 50 से 100 मीटर के दायरे में आने वाले खेतों में यह समस्या सबसे गंभीर देखी जा रही है। दूर से देखने पर फसल बेहद शानदार और स्वस्थ नजर आती है, लेकिन जब किसान खेत के अंदर जाकर पौधों को देखते हैं, तो उनमें एक भी फली नजर नहीं आती। लागत डूबने की कगार पर पहुंचने के कारण अब किसान सरकार से इस नुकसान के सर्वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
कृषि विभाग ने दी यह सलाह
कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र के किसानों को सलाह दी है कि इस समस्या से बचने के लिए वे हाईवे की लाइटों के सामने वाले हिस्से में अस्थाई रूप से ग्रीन नेट (Green Net) या ओट (Arad) लगा सकते हैं, ताकि रात की रोशनी सीधे पौधों पर न पड़े। इसके अलावा, आने वाले सीजन में हाईवे के किनारे वाले खेतों में प्रकाश के प्रति असंवेदनशील फसलों को उगाने का सुझाव दिया जा रहा है।


