Saturday, August 22, 2026

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इंदौर में बड़ा खुलासा: 6 बड़े सरकारी अस्पतालों के पीने के पानी में मिले मल-मूत्र वाले कीटाणु, NABL रिपोर्ट से मचा हड़कंप

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। शहर के 9 प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के पीने के पानी का जब हेल्थ ऑडिट किया गया, तो व्यवस्था की पोल खुलकर रह गई। राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) द्वारा प्रमाणित लैब की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इंदौर के 6 बड़े अस्पतालों के पेयजल स्रोतों में मानव और पशुओं के मल-मूत्र में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं।

जांच रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इन नमूनों में ई-कोलाई (E. coli) और टोटल कॉलिफॉर्म (Total Coliform) जैसे खतरनाक जीवाणुओं की पुष्टि हुई है। यह वही खतरनाक बैक्टीरिया है, जिसने इस साल की शुरुआत में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की त्रासदी फैलाई थी।

क्या है ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म? डॉक्टर क्यों जता रहे हैं चिंता?

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई मुख्य रूप से इंसानों और जानवरों की आंतों में पाया जाने वाला बैक्टीरिया है। पानी में इसकी मौजूदगी सीधे तौर पर इस बात का संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज या मल-मूत्र का गंदा पानी मिक्स हो रहा है।

कमजोर मरीजों के लिए जानलेवा खतरा:
अस्पतालों में भर्ती मरीज, आईसीयू के मरीज, नवजात बच्चे और ऑपरेशन करा चुके लोग पहले से ही बेहद कमजोर इम्यूनिटी वाले होते हैं। ऐसा दूषित पानी पीने से उनमें पेट का गंभीर संक्रमण, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, पीलिया और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।

व्यवस्थाओं की खुली पोल: एनजीओ और प्रबंधन पर सवाल

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एमवाय और पीसी सेठी जैसे बड़े अस्पतालों में पेयजल व्यवस्था का जिम्मा ‘संवेदना एनजीओ’ के पास है, जिन्होंने बड़े आरओ प्लांट लगाए हैं। इसके बावजूद वाटर कूलर के आसपास फैली गंदगी और सही समय पर मेंटेनेंस न होने की वजह से यह बैक्टीरिया पनपे हैं।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति (HICC) के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों में नियमित रूप से इंफेक्शन控制 कमेटी की बैठकें होती हैं और पानी की जांच भी कराई जाती है। इस रिपोर्ट में जहां भी कमियां और बैक्टीरिया मिले हैं, वहां के अस्पताल अधीक्षकों को तुरंत कड़े कदम उठाने और क्लोरिनेशन व टैंक सफाई की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

चिकित्सकीय चेतावनी: ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया से दूषित पानी पीने से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। यदि आपके आसपास किसी में पेट दर्द, उल्टी या दस्त के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नवजात बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए उबला हुआ या पूरी तरह से प्रमाणित शुद्ध पानी ही इस्तेमाल करें।


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