इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद ही भावुक और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गरीबी और लाचारी की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने हर किसी की आँखें नम कर दीं। विजय नगर इलाके में रहने वाले एक गरीब युवक की मौत के बाद, उसकी पत्नी के पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे। वह अपनी दो साल की मासूम बेटी के साथ अस्पताल में शव के पास बैठकर घंटो रोती रही। अंत में, उसी 2 वर्षीय मासूम बच्ची ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
कचरा बीनकर चला रहे थे परिवार का गुजारा
मिली जानकारी के मुताबिक, विजय नगर क्षेत्र में रहने वाला अर्जुन नाम का युवक पन्नी (प्लास्टिक कचरा) बीनकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परिवार में उसकी पत्नी और एक दो साल की बेटी है। पिछले कुछ दिनों से अर्जुन गंभीर रूप से बीमार था, जिसके बाद उसे इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान अर्जुन ने दम तोड़ दिया।
जेब में नहीं थे पैसे, शव के पास रोती रही बेबस पत्नी
अर्जुन की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अत्यंत गरीबी के कारण बेबस पत्नी के पास न तो अस्पताल का खर्च चुकाने के पैसे थे और न ही पति के शव को मुक्तिधाम तक ले जाने और कफन-दफन की व्यवस्था करने की सामर्थ्य थी। कोई रास्ता न सूझने पर वह अपनी दो साल की बेटी को गोद में लेकर अस्पताल में पति के शव के पास बैठकर बिलखती रही।
समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ
जब इस दर्दनाक स्थिति की भनक समाजसेवी अजय नागदा को लगी, तो उन्होंने तुरंत ‘प्रीयु फाउंडेशन’ संस्था से संपर्क किया। संस्था के सदस्य तुरंत एमवाय अस्पताल पहुँचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। समाजसेवियों ने न केवल अस्पताल की औपचारिकताएं पूरी करवाईं, बल्कि अपनी तरफ से एम्बुलेंस की व्यवस्था कर शव को रीजनल पार्क मुक्तिधाम पहुँचाया।
मुक्तिधाम में रो पड़ा हर शख्स
क्षेत्रीय पार्क मुक्तिधाम में संस्था के सहयोग से अंतिम संस्कार की सामग्रियाँ जुटाई गईं। जब अंतिम विदाई का समय आया, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। जिस दो साल की मासूम बच्ची को यह भी नहीं पता था कि ‘मौत’ क्या होती है और उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, उस नन्ही सी बच्ची के हाथों में जलती हुई लकड़ी (लोकाठ) थमाई गई। मासूम ने जब अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी, तो मुक्तिधाम में मौजूद सभी लोगों के आँसू छलक पड़े।
