जन -धन योजना की आर्थिक प्रगति की समीक्षा
प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाय) देश ही नहीं बल्कि विश्व के सभी देशों से सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल की गई– एक मिशाल योजना बन कर उभरी है। वित्तीय समावेश के उद्देश्य से बारह वर्ष पूर्व 28 अगस्त, 2014 को इस योजना की शुरुआत की गई थी। योजना गरीबों को आर्थिक मुख्य धारा में लाने के विकास की महत्ती भूमिका में अग्रसर हुई।इस योजना का मुख्य लाभ यह है, कि जो अधिकांश गरीबों को बैंकिंग की व्यवस्था से दूरी थी, वह बिल्कुल खत्म इसलिए हो गई, कि बिना किसी राशि के खाते खुलवाने की सुविधा प्रदान की गई। इन खातों के खुलने से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे खातों में पहुंची और डिजिटल भुगतान का भी अहम जरिया बना।
जब यह योजना शुरू की गई थी, तब ऐसे सवाल उठे थे, कि आखिर जनधन खातों में पैसा कहाँ से आएगा ? आँकड़े बता रहें है कि 31 मार्च, 2015 तक योजना के तहत तक 14.72 करोड़ खाते खोले गए थे, जिनकी संख्या 30 अगस्त, 2024 तक 53 करोड़ हो चुकी है। इस समय तक इन खातों में सिर्फ 15,670 करोड़ रू. जमा थे, इस वर्ष 28 अगस्त 2024 तक 2.3 लाख करोड़ रू. जमा हो गए। मार्च, 2015 में प्रति खाता औसत शेष 1,065 रू. था। अब यह बढ़कर 4,325 रू. का हो गया है। अभी इस योजना की प्रगति यह है, कि 29 अगस्त 2026 में 59.09 करोड़ खाता खुल गए । वही 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में खुले हुए हैं । इन खातों में 32.92 करोड़ खाताधारी महिलाएं हैं। यूं देखे तो खाताधारियों में लगभग हर पांच में से चार (80 परसेंट) खाते ग्रामीण और अर्ध शहरी शाखाओं में है। यह आंकड़े औपचारिक बैंकिंग के उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाते हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा सरकारी बैंक संभाले हुए हैं।इस योजना के खातों में जमा राशि भी लगातार बढ़ रही है। मार्च, 2015 में इन खातों में 15,670 करोड रुपए जमा थे, जो 26 अगस्त, 2026 तक बढ़कर 3.16 लाख करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में कुल जमा राशि 20 गुना से ज्यादा बड़ी है। वही 29 अगस्त 2026 तक 59 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुल गए हैं।इससे यह स्पष्ट है , कि यह योजना अंतिम छोर पर खड़े वंचित लोगों तक पहुंची है। योजना में खाता धारकों को डिजिटल भुगतान के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। खातों के संचालन के लिए डेबिट कार्ड जारी किए गए , उसमें 16 अगस्त 2024 तक कुल 53 करोड़ खाताधारियों में से 33.98 करोड़ से अधिक खाताधारियों को रुपएं डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके है। इसके अलावा 10,000 रू. तक का ओवर ड्राफ्ट, दो लाख ₹ का दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएँ भी मिलती है। इसमें महत्वपूर्ण यह है, कि खाता जीरो बैलेंस खाता है। मतलब यह इस खाते में न्यूनतम राशि रखने की आवश्यकता नहीं होती है। अन्य बैंक बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखे जाने पर अब भी कई बैंक खाताधारकों से जुमार्ना वसुल रहे है। आरबीआई ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में न्यूनतम बैलेंस कम होने पर बैंकों ने खाता धारकों से 18,000 करोड़ ₹ की वसूली की। वैसे आरबीआई के आदेश बैंक खाते में न्यूनतम निर्धारित बैलेंस नहीं होने पर कुछ शुल्क लेते थे, वहीं दूसरी और एसबीआई ने ऐसा शुल्क लेना बंद कर दिया है। देखा जाय तो देशभर में इस प्रकार के 70 करोड़ खाते है, जो जनधन योजना से अधिक है। जुमार्ना वसूल करने वाले बैंक से लोग हटते हुए देखे जा रहे है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्बोधनमें जनधन योजना के बारे में जनता को कई अपने मन की बाते बताई है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने कारण वे एक रूपया भी नहीं बचा पाते थे, जिसके चलते उनका बैंक खाते में कई सालों तक एक रूपया भी नहीं रहा था। मोदीजी ने बैंक को होने वाली परेशानी को महसूस करते हुए खुद ही अकाउंट बंद कर दिया। अब उन्होंने खाते खोलने पर जोर दिया है। अब जनधन खाता धारक बैंक से उधार लेने के साथ अन्य सुविधाएं भी हासिल कर सकते है। मोदी सरकार के पहले किसी ने भी यह नहीं सोचा कि गरीबों को भी बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत है। इसके कारण करोड़ों लोग आर्थिक मुख्यधारा से बाहर थे। यह तो निश्चित है कि कोई भी देश अपने बलबुते पर समर्थ तभी बन पाता है जब उसका प्रत्येक नागरिक आर्थिक विकास की मुख्यधारा ओर वित्तीय गतिविधियों से जुड़ता है। इस योजना से यह तथ्य स्पष्ट है कि देश की आर्थिक प्रगति में सभी का योगदान है। देश की केन्द्र व राज्य सरकारे जन कल्याणकारी कार्यों को करने हेतु आर्थिक रूप से गरीब जनता की ओर ध्यान देना होगा। इससे बचत को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ऋण की पहुंच आसान होगी। देश में सरकारी योजनाएँ भ्रष्ट तत्वों की लूटपात से बचाने के लिए बैंकिंग के विकास से योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों में भेजना आसान नहीं था, वही मोदी सरकार ने हर स्तर पर जवाबदारी सुनिश्चित करके इस असंभव लक्ष्य को हासिल किया। इसके साथ ही अपराध की दर में गिरावट के साथ नशीले पदार्थों का सेवन कम होने लगेगा।
डॉ. बी. आर. नलवाया, मंदसौर


