Thursday, September 24, 2026

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मऊगंज: पहली बार पानी भरते ही ढही 30 फीट ऊंची टंकी, ₹3.85 करोड़ के घोटाले में तत्कालीन 3 इंजीनियर्स और ठेकेदार पर FIR

मऊगंज: पहली बार पानी भरते ही ढही 30 फीट ऊंची टंकी, ₹3.85 करोड़ के घोटाले में तत्कालीन 3 इंजीनियर्स और ठेकेदार पर FIR

मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों में एक बड़ा महाघोटाला सामने आया है। नईगढ़ी ब्लॉक के खटखरी गांव में करीब 30 फीट ऊंची बनाई गई पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान पहली ही बार में ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW रीवा) ने जांच के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के तीन तत्कालीन इंजीनियरों और मुख्य ठेकेदार के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।

पहली बार पानी भरते ही खुली पोल

यह पूरा मामला साल 2021-22 में स्वीकृत हुई ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना का है। नईगढ़ी क्षेत्र के खटखरी, शिवराजपुर, करह, जुड़मनिया और रघुनाथ सहित करीब आधा दर्जन गांवों में घर-घर नर्मदा या बोरवेल का पानी पहुंचाने के लिए ₹3.85 करोड़ की लागत से ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन का काम शुरू किया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के दावों के बाद करीब छह महीने पहले जब टंकी में पहली बार पानी भरा गया, तो वह वजन संभाल नहीं पाई और पूरी तरह ढह गई। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर बेहद घटिया और पतली सरियों का इस्तेमाल किया गया था।

कागजों पर काम 100% पूरा दिखाकर निकाला पैसा

EOW रीवा और तकनीकी टीम की संयुक्त जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। विभाग के इंजीनियरों और ठेकेदार ने आपस में मिलीभगत कर रिकॉर्ड में काम को शत-प्रतिशत पूरा (100% Complete) दिखा दिया था। काम पूरा होने के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर ठेकेदार को ₹3.85 करोड़ की पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया गया। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि कई गांवों में आज भी पाइपलाइन का काम अधूरा पड़ा है और घरों में घरेलू नल कनेक्शन तक नहीं पहुंचे हैं।

इन अधिकारियों और ठेकेदार पर दर्ज हुआ केस

मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW रीवा ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सरकारी धन के गबन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों में ये नाम शामिल हैं:

  • शिवेंद्र कुमार तिवारी – मुख्य ठेकेदार (मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी)
  • जनार्दन प्रसाद द्विवेदी (जे.पी. द्विवेदी) – तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE, PHE)
  • संजय पांडेय – तत्कालीन सहायक यंत्री (AE)
  • ए.पी. तिवारी – तत्कालीन उपयंत्री (Sub-Engineer)

EOW अधिकारियों के मुताबिक, मामले में पुख्ता तकनीकी साक्ष्य और दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और भ्रष्टाचार की राशि की रिकवरी के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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