मेरठ के बहुचर्चित ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ में जिला अदालत ने आज एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा (सजा-ए-मौत) सुनाई है। मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने इस जघन्य हत्याकांड को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) श्रेणी का माना और दोनों दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया। फैसला सुनाते समय कोर्ट ने महाभारत का संदर्भ देते हुए टिप्पणी की कि अधर्म या अपराध के मार्ग पर चलने वालों को उनके कर्मों के अनुरूप उचित दंड देना भी न्याय और धर्म का ही हिस्सा है।
क्या था पूरा मामला और क्रूरता की कहानी
यह सनसनीखेज मामला मार्च 2025 का है, जब मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की उनके ही घर में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच और कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर इस पूरी खौफनाक साजिश को अंजाम दिया था। मुस्कान ने पहले अपने पति को नशीला पदार्थ दिया और फिर साहिल के साथ मिलकर चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी।
अपराध को छुपाने के लिए दोनों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने सौरभ के शव के टुकड़े किए और उसे घर में रखे एक बड़े नीले प्लास्टिक के इंडस्ट्रियल ड्रम के अंदर डाल दिया। बदबू और राज छुपाने के उद्देश्य से उन्होंने उस ड्रम को सीमेंट, रेत और कंक्रीट के मिक्चर से पूरी तरह भरकर सील कर दिया था।
हत्या के बाद घूमने निकले, ऐसे खुला राज
वारदात को अंजाम देने के अगले ही दिन यानी 4 मार्च 2025 को आरोपी मुस्कान अपने प्रेमी साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला में छुट्टियां मनाने और घूमने चली गई थी। जब वह करीब दो हफ्ते बाद 17 मार्च को मेरठ वापस लौटी, तो गहन पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल किया। इसके बाद 18 मार्च 2025 को पुलिस ने उनके इंद्रानगर स्थित घर से सीमेंट से जमे उस नीले ड्रम को बरामद कर शव को बाहर निकाला, जिसके बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।
13 महीने का ट्रायल और गवाही
इस मामले का अदालती ट्रायल जुलाई 2025 में शुरू हुआ था, जो करीब 13 महीनों तक चला। इस दौरान कुल 126 नियमित पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की तरफ से बेहद मजबूत पैरवी करते हुए 22 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए गए। अदालत ने सभी सबूतों को पर्याप्त मानते हुए दोनों को 30 सितंबर 2026 को ही दोषी करार दे दिया था और आज सजा की तारीख तय की थी।
कोर्ट रूम का माहौल और मुस्कान के आखिरी शब्द
आज दोनों दोषियों को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश किया गया था। जैसे ही माननीय न्यायाधीश ने दोनों को फांसी की सजा का हुक्म सुनाया, वैसे ही मुस्कान और साहिल कोर्ट रूम में ही फूट-फूटकर रोने लगे। जेल जाने से पहले रोते हुए दोषी मुस्कान ने कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों से रुआंसे गले से कहा, “मेरी बच्चियों का ध्यान रखना”।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद मुस्कान के माता-पिता ने भी अपनी बेटी के इस कृत्य का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कोर्ट के बाहर साफ शब्दों में कहा कि दामाद सौरभ एक बहुत अच्छा इंसान था, और यदि अदालत ने उनकी बेटी को मौत की सजा दी है, तो वे इसके खिलाफ कोई विरोध या अपील नहीं करेंगे। मृतक सौरभ के भाई और परिवार ने इस फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा था और आज उनके भाई की आत्मा को सच्चा इंसाफ मिला है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब इस फैसले की पुष्टि के लिए मामला उच्च न्यायालय भेजा जाएगा।


