शेयर बाजार का महाकुंभ: भारत के सबसे बड़े ₹30,000 करोड़ के NSE IPO को SEBI की हरी झंडी, टूटेंगे कमाई के सारे रिकॉर्ड!
बिजनेस डेस्क,
5 सितंबर 2026
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया पन्ना जुड़ने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 4 सितंबर की देर शाम मिली, जिसके बाद घरेलू बाजार में अब तक के सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि सितंबर का यह महीना दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के लिए बंपर कमाई और हलचल लेकर आने वाला है।
इस मेगा IPO की 4 सबसे बड़ी बातें
- हुंडई और LIC का रिकॉर्ड ध्वस्त: इस आईपीओ का कुल आकार ₹30,000 करोड़ से ₹31,500 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है। यह हुंडई मोटर इंडिया (₹27,870 करोड़) के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा।
- टॉप-10 क्लब में धमाकेदार एंट्री: बाजार में लिस्ट होते ही NSE का कुल मूल्यांकन (Valuation) लगभग ₹5.25 lakh करोड़ ($55 बिलियन) को पार कर सकता है। इस आंकड़े के साथ NSE सीधे भारत की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों की लीग में शामिल हो जाएगा।
- पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS): इस आईपीओ के जरिए कोई भी नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है। एक्सचेंज के मौजूदा बड़े संस्थागत निवेशक (जैसे SBI ग्रुप, बैंक ऑफ बड़ौदा और कई विदेशी फंड्स) अपनी लगभग 6% हिस्सेदारी (करीब 15 करोड़ शेयर) बेचकर आंशिक रूप से बाहर निकलेंगे।
- BSE पर होगी शेयरों की ट्रेडिंग: सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के अनुसार, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। यही वजह है कि NSE के शेयरों की लिस्टिंग और दैनिक खरीद-बिक्री इसके प्रतिद्वंदी प्लेटफॉर्म यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर की जाएगी।
संभावित टाइमलाइन: कब खुलेगा निवेश का मौका?
बैंकिंग और मर्चेंट सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मेगा आईपीओ का टेंटेटिव शेड्यूल कुछ इस प्रकार रह सकता है:
- प्राइस बैंड का आधिकारिक ऐलान: 11 से 14 सितंबर 2026
- निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन ओपन: 16 सितंबर 2026
- डीमैट खाते में शेयरों का अलॉटमेंट: 22 सितंबर 2026
- BSE पर धमाकेदार लिस्टिंग: 24 या 25 सितंबर 2026
10 साल का लंबा इंतजार और कानूनी अड़चनें
NSE की आईपीओ लाने की कोशिशें पिछले एक दशक से चल रही हैं। एक्सचेंज ने पहली बार साल 2016 में इसके लिए आवेदन किया था। लेकिन इसी दौरान चर्चित ‘को-लोकेशन विवाद’ (Co-location Controversy) सामने आ गया, जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को सर्वर का अर्ली एक्सेस देकर अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप था। इस वजह से सेबी ने आईपीओ पर रोक लगा दी थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी और सेबी के साथ पुराना कानूनी विवाद पूरी तरह सुलझने के बाद आखिरकार इस फाइल को मंजूरी मिल सकी है।
निवेशकों के लिए क्या है खास? (एक्सपर्ट ओपिनियन)
ग्रे मार्केट (Grey Market Premium – GMP) के शुरुआती रुझानों और प्री-आईपीओ वैल्यूएशन को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके एक शेयर का प्राइस बैंड ₹2,000 से ₹2,100 के आसपास तय किया जा सकता है। दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज का हिस्सा बनने के लिए रिटेल और संस्थागत दोनों ही निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श जरूर लें।)


