SMS अस्पताल में पहली बार साइलो-एंडोस्कोपिक ऑपरेशन, बिना चीरा हुआ इलाज
राजस्थान का सरकारी स्तर पर पहला साइलो-एंडोस्कोपिक ऑपरेशन
जयपुर, 23 अगस्त 2026। सवाईमानसिंह अस्पताल के ईएनटी विभाग में लार ग्रंथि के ऑपरेशन को साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक से किया गया। सरकारी स्तर पर इस तकनीक से ये राज्य का इस प्रकार का प्रथम ऑपरेशन है।
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ पवन सिंघल ने रेवाड़ी के 28 वर्षीय शिव कुमार की सबमंडीबुलर ग्रंथि की पथरी तथा झुंझुनू के 13 वर्षीय फैजान की पैरोटिड ग्रंथि के स्टेनोसिस का बिना चीरा लगाए मुंह के अंदर से ही सियलो एंडोस्कोपी (दूरबीन) द्वारा ऑपरेशन किया। इस तकनीक में मरीज की गर्दन और चेहरे पर बिना चीरा लगाए मुंह के अंदर से ही लार ग्रंथि के प्राकृतिक छिद्र में दूरबीन डालकर लार की ग्रंथियों की पथरी को सफलतापूर्वक निकाल लिया जाता है। यह तकनीक लार ग्रंथियों के ऑपरेशन की दूसरी सभी तकनीकों से बेहतर है क्योंकि इसमें किसी भी तरह का कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं होता।
ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूर्णतया स्वस्थ है और उन्हें ना तो दर्द है और ना ही उनके किसी तरह का कोई निशान या चीरा है।
उन्होने बताया कि लार ग्रंथियों के ऑपरेशन में कई बार चेहरे की विकृति, लकवा होने का डर मरीज में बना रहता है, जबकि इस साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक में इस तरह का कोई खतरा नहीं होता है।
उन्होने बताया कि इन मरीजों का इलाज राजस्थान सरकार की मां योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया है।
ये है साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ पवन सिंघल ने बताया कि साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक (Silo-endoscopic technique) जिसमें बिना चीरा लगाने वाली सर्जिकल तकनीक है, जिसमें डॉक्टर शरीर के अंदर मौजूद समस्या को एंडोस्कोप की मदद से देखते हैं और छोटे रास्ते से उपचार या सर्जरी करते हैं।
उनके साथ टीम में ईएनटी विभाग के डॉ पंकज गर्ग, डॉ आंचल अग्रवाल, डॉ सिद्धार्थ सिकरवाल, डॉ इशिता बंसल, निश्चेतन विभाग की टीम में डॉ सोनाली बेनीवाल और डॉ महिपाल तथा नर्सिंग ऑफिसर संदीप एवं दीपिका ने सहयोग किया।


