महंगाई का बड़ा झटका: सितंबर में 10% के पार जा सकती है थोक महंगाई दर, खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान पर
नई दिल्ली:
देश में आम आदमी की जेब और रसोई के बजट पर महंगाई का दबाव लगातार गहराता जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं, विशेष रूप से सब्जियों और रोजमर्रा के राशन की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण सितंबर महीने में थोक महंगाई दर (WPI) 10 फीसदी के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर सकती है। आर्थिक जानकारों और वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके 10.60% के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। इससे ठीक एक महीने पहले, अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92% दर्ज की गई थी।
सब्जियों और खाद्य पदार्थों ने बिगाड़ा खेल
थोक बाजार में महंगाई की इस रिकॉर्ड रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह खाद्य सामग्री की कीमतों में हुआ बेतहाशा इजाफा है। सितंबर महीने के दौरान सालाना आधार पर सब्जियों की कीमतों में 15 फ़ीसदी से ज़्यादा का उछाल आने की संभावना जताई गई है। वहीं मासिक आधार पर भी अगस्त के मुकाबले सितंबर में सब्जियां करीब 8.50% तक महंगी हुई हैं। इसके अलावा, मसालों और तैयार खाद्य उत्पादों (मैन्युफैक्चरर्ड फूड) की महंगाई दर भी दहाई के आंकड़े में बनी हुई है। खुदरा बाजार की बात करें तो प्याज, लहसुन और अदरक जैसी बुनियादी चीजों के दामों ने आम उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा परेशान किया है।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर
खाद्य वस्तुओं के अलावा वैश्विक मोर्चे पर चल रही उथल-पुथल भी इस बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ईंधन और बिजली की बढ़ती लागत का सीधा असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं पर पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है। यही वजह है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े उत्पादों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
खुदरा बाजार में भी रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी
थोक बाजार के ये दबाव अब सीधे तौर पर खुदरा बाजार यानी रिटेल मार्केट में भी साफ दिखाई देने लगे हैं। हाल ही में सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है, जो कि अगस्त में 4.82% थी। यह पिछले 23 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इस दौरान खुदरा खाद्य महंगाई दर भी 5.97% से बढ़कर 7.74% पर आ गई है, जिसका सीधा असर आम जनता की थाली पर पड़ रहा है।
आम जनता और नीति निर्माताओं की बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ती महंगाई के कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर भी नीतिगत दरों को लेकर दबाव बढ़ गया है। बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने हाल ही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम उठाया था। जानकारों का मानना है कि यदि थोक महंगाई लंबे समय तक दहाई के आंकड़े (Double Digit) में बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में कंपनियों के लिए उत्पादन लागत बढ़ेगी और वे इसका पूरा बोझ अंतिम उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे बाजार में हर छोटी-बड़ी चीज और महंगी हो सकती है।


