दिल्ली हादसे के बाद एक्शन में बिहार सरकार; पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में 400 अवैध हॉस्टल और PG पर चलेगा डंडा
पटना:
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी (PG) बिल्डिंग ढहने के दर्दनाक हादसे के बाद बिहार सरकार और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। राज्य में छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर समेत कई बड़े एजुकेशन हब्स में 400 से ज्यादा अनरजिस्टर्ड हॉस्टल और पीजी (PG) की पहचान की गई है। पटना हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों और दिल्ली की घटना से सबक लेते हुए गृह विभाग ने इन अवैध संस्थानों पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख जिलों में अवैध हॉस्टल्स की स्थिति
जांच और सर्वे के दौरान सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर सबसे ज्यादा अवैध हॉस्टल्स उन्हीं शहरों में चल रहे हैं जहाँ कोचिंग और कॉलेजों की संख्या अधिक है:
- पटना: राज्य की राजधानी में सबसे बुरा हाल है, जहाँ 154 गर्ल्स हॉस्टल बिना किसी कानूनी रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे हैं.
- भागलपुर: सिल्क सिटी के नाम से मशहूर इस जिले में 73 हॉस्टल्स अवैध पाए गए हैं.
- मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार के इस प्रमुख शैक्षणिक केंद्र में 6 बड़े हॉस्टल्स बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं.
- अन्य जिले: गया, दरभंगा और पूर्णिया जैसे शहरों में भी लगभग 150 से अधिक छोटे-बड़े पीजी और हॉस्टल्स की सूची तैयार की गई है.
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही
प्रशासन के मुताबिक, इन चिन्हित हॉस्टल्स और पीजी के पास स्थानीय नगर निगम या जिला प्रशासन से कोई क्लीयरेंस (निबंधन) नहीं है। इनमें से अधिकतर संस्थानों में सुरक्षा नियमों का घोर उल्लंघन पाया गया है:
- फायर सेफ्टी का अभाव: ज्यादातर बिल्डिंग्स में आग बुझाने वाले यंत्र (Fire Extinguishers) या आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था नहीं है.
- ओवरक्राउडिंग: कम जगह में क्षमता से दोगुने छात्रों को रखा जा रहा है, जिससे इमारतों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है.
- घटिया निर्माण: दिल्ली हादसे की तरह कई हॉस्टल्स पुरानी और जर्जर आवासीय इमारतों में कमर्शियल रूप से चलाए जा रहे हैं.
प्रशासन का सख्त रुख: पुलिस वेरिफिकेशन हुआ अनिवार्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने सभी जिला कप्तानों (SP/SSP) को कड़े एक्शन प्लान पर काम करने को कहा है:
- अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन: अब सभी हॉस्टल संचालकों, वहां काम करने वाले वॉर्डन, गार्ड, कुक और रहने वाले छात्रों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है.
- बिल्डिंग सील करने की कार्रवाई: तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन न कराने वाले और सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरने वाले हॉस्टल्स को तुरंत सील किया जाएगा.
- मकान मालिकों पर कानूनी शिकंजा: अवैध रूप से बिना कमर्शियल लाइसेंस के हॉस्टल चलाने वाले मकान मालिकों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इस औचक जांच और संभावित कार्रवाई की खबर से राज्य भर के हॉस्टल संचालकों में हड़कंप मच गया है, वहीं दूर-दराज के गांवों-कस्बों से आकर पढ़ाई कर रहे छात्रों के अभिभावकों ने सुरक्षा के लिहाज से सरकार के इस कदम की सराहना की है.


