Wednesday, October 7, 2026

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Homeहरियाणाप्रेरणादायी पुस्तकों का विमोचन साहित्यिक संवाद को देगा नई दिशा

प्रेरणादायी पुस्तकों का विमोचन साहित्यिक संवाद को देगा नई दिशा

–  ‘*अथर्ववेदामृत’ एवं ‘मेहनत का फल’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित*

मनोज शर्मा,चंडीगढ़, 23 अगस्त 2026। संवाद साहित्य मंच, चंडीगढ़ तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पंचकूला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में श्रीमती सिकंदरा देवी फाउंडेशन की ओर से दो प्रेरणादायी पुस्तकों ‘अथर्ववेदामृत’ (काव्य संग्रह) एवं ‘मेहनत का फल’ (बाल कहानी संग्रह) का भव्य विमोचन समारोह चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ संगीता कुंद्रा गीत द्वारा सरस्वती वंदना से किया।
कार्यक्रम में ‘अथर्ववेदामृत’ के रचनाकार डॉ. विनोद कुमार शर्मा तथा ‘मेहनत का फल’ के लेखक प्रेम विज ने अपनी पुस्तकों की रचना-यात्रा, उद्देश्य एवं साहित्यिक सरोकारों पर प्रकाश डाला।
समारोह में मुख्य अतिथि  विद्या धाम अमेरिका की संस्थापिका डॉ सरिता मेहता,  तथा अध्यक्ष  के.के. शारदा और विशिष्ट अतिथि डॉ. संतोष गर्ग ने पुस्तकों का विमोचन किया। डॉ सरिता मेहता ने दोनों लेखकों को उनकी साहित्यिक कृतियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसी रचनाएं समाज में ज्ञान, संस्कार, परिश्रम और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।आचार्यकुल एवं खादी सेवा संघ के अध्यक्षता के के शारदा ने विशेष रूप से बच्चों के लिए लिखी गई ‘मेहनत का फल’ को संस्कार, परिश्रम और जीवन-मूल्यों से जोड़ने वाली उपयोगी कृति बताया, जबकि ‘अथर्ववेदामृत’ को काव्य के माध्यम से भारतीय चिंतन, जीवन-दर्शन एवं संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाला संग्रह बताया।
डॉ संतोष गर्ग ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने और नई पीढ़ी में मानवीय मूल्यों का विकास करने का सशक्त माध्यम है। मंच का कुशल संचालन जाने-माने साहित्यकार अनिल चिंतक ने किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रज्ञा शारदा, अनिल चिंतक, राजेश शर्मा, प्रदीप कुमार, राज विज, संगीता कुंद्रा गीत, अंजू मोदगिल सहित अनेक साहित्यकार, लेखक एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में साहित्य और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श एवं संवाद भी हुआ।
  कार्यक्रम के अंत में प्रेम विज एवं डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। समारोह ने साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना और रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

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