चुनाव आयोग विवाद: SIR और ‘वोट चोरी’ पर राहुल, अखिलेश के बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बंगाल के नेताओं का फूटा गुस्सा; पूरे विपक्ष ने खोला मोर्चा
नई दिल्ली, 23 सितम्बर 2026: मतदाता सूची के सेंट्रलाइजेशन और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान पर अब पूरे देश का विपक्ष एकजुट हो गया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट के बाद, जिसमें खुलासा हुआ कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं, अब मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के बड़े नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इस बड़े विवाद पर अलग-अलग राज्यों के नेताओं के प्रमुख बयान निम्नलिखित हैं:
1. मध्य प्रदेश कांग्रेस (प्रदेश नेतृत्व का साझा रुख): “MP में 34 लाख नाम काटना डिजिटल धांधली”
मध्य प्रदेश में हाल ही में समाप्त हुई SIR प्रक्रिया के तहत 34.25 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इस आंकड़े को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को घेरा है।
एमपी कांग्रेस नेताओं का बयान:“मध्य प्रदेश में पहले से ही करीब 60 लाख फर्जी नामों की शिकायतें रही हैं, लेकिन अब चुनाव आयोग ने दिल्ली के सॉफ्टवेयर के जरिए जमीनी अधिकारियों को बाईपास करके चुपचाप 34 लाख से ज्यादा वोट काट दिए। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में 15% से 20% तक नाम हटा दिए गए हैं। यह सीधे तौर पर विपक्ष को कमजोर करने और डिजिटल माध्यम से ‘वोट चोरी’ करने का सबसे बड़ा उदाहरण है। चुनाव आयोग को जवाब देना होगा कि यह नाम किसके इशारे पर काटे गए।”
2. राहुल गांधी (कांग्रेस नेता): “यह देश के खिलाफ गद्दारी है, वक्त आने पर पकड़ेंगे”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर वीडियो जारी कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है और इसे ‘वोट चोरी’ (Vote Chori) करार दिया है।
राहुल गांधी का बयान:“वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ एक गंभीर अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग के जिन अधिकारियों ने मिलकर इसे आयोजित किया है, उन्होंने देश के साथ गद्दारी की है। मैं चुनाव आयोग के अधिकारियों से साफ कह रहा हूं—आप जो कर रहे हैं, गलत कर रहे हैं। समय आएगा, हम आपको पकड़ेंगे, कोई बचने वाला नहीं है। न्याय होकर रहेगा।”
3. अखिलेश यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी): “यह स्वतंत्र निष्पक्ष चुनाव पर सबसे बड़ा प्रहार है”
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस खुलासे पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा है।
अखिलेश यादव का बयान:“अगर देश की सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के भीतर ही दो-दो चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और सेंट्रलाइज्ड फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, तो यह बात साफ है कि पूरी दाल ही काली है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में विपक्ष के वोट काटने की जो साजिशें हम लगातार उठाते रहे हैं, आज वह सच साबित हो गई हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।”
4. संजय राउत (सांसद, शिवसेना UBT – महाराष्ट्र): “यह लोकतंत्र के साथ किया गया सबसे बड़ा अपराध है”
महाराष्ट्र में होने वाले आगामी चुनावों और वहां बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम हटाए जाने के दावों के बीच संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर सीधा हमला बोला है।
संजय राउत का बयान:“मुख्य चुनाव आयुक्त भारतीय जनता पार्टी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। आयोग के बाकी दो सदस्य खुद लिखित में कह रहे हैं कि उनके ज्ञान के बिना देश की पूरी मतदाता सूची बदल दी गई। यह किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा हमारे लोकतंत्र के खिलाफ किया गया अब तक का सबसे बड़ा अपराध है। हम संसद के शीतकालीन सत्र में इनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment Motion) लाने पर विचार कर रहे हैं।”
5. महुआ मोइत्रा (सांसद, टीएमसी – पश्चिम बंगाल): “संसद भंग हो, चुनाव दोबारा कराए जाएं”
पश्चिम बंगाल में भी एक ही सरकारी लॉगिन से 16 लाख से अधिक सुधार अपीलों के ऑटोमेटेड होने का मामला सामने आया है। इस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा ने तीखा रुख अपनाया है।
महुआ मोइत्रा का बयान:“यह बेहद हैरान करने वाला है कि फॉर्म-6 में अवैध बदलाव किए गए ताकि नए युवा मतदाता आसानी से रजिस्टर न हो सकें। जब चुनाव आयोग की पूरी बुनियाद ही इस त्रुटिपूर्ण और छेड़छाड़ की गई मतदाता सूची पर टिकी है, तो वर्तमान लोकसभा को तुरंत भंग कर देना चाहिए और नए सिरे से पारदर्शी तरीके से चुनाव होने चाहिए।”
6. संजय सिंह (आम आदमी पार्टी सांसद): “देश में चुनावों की खुली लूट चल रही है”
दिल्ली में जारी SIR प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम कटने के दावों पर आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है।
संजय सिंह का बयान:“देश में इस वक्त चुनावों की खुली लूट चल रही है। चुनाव आयोग के अंदर दोनों चुनाव आयुक्त खुद चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि आपका यह सेंट्रलाइज्ड तरीका गलत है, इससे जमीनी अफसरों के अधिकार छीने जा रहे हैं। इस SIR के खेल के बाद अब देश में चुनाव का कोई मतलब नहीं बचा है।”
7. चुनाव आयोग (ECI) की आधिकारिक सफाई: “मतभेद स्वाभाविक हैं, पर फैसले सर्वसम्मति से हुए”
चारों तरफ से घिरने के बाद भारतीय चुनाव आयोग के सूत्रों ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर आयोग के भीतर किसी भी तरह की ‘जंग’ या ‘अवैध फैसलों’ की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चुनाव आयोग का रुख:“भारतीय चुनाव आयोग के सभी फैसले, जिसमें SIR भी शामिल है, पूरी तरह सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों व मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी के बाद ही लिए गए हैं। किसी भी आयोग या संस्था में विचार-विमर्श के दौरान आंतरिक रूप से अलग-अलग राय होना, सवाल उठाना या स्पष्टीकरण मांगना एक स्वाभाविक और स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। इन शुरुआती चर्चाओं और टिप्पणियों को औपचारिक असहमति (Dissent) नहीं कहा जा सकता।”


