नई दिल्ली:
वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल के कारण घरेलू वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है। अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा बढ़ी उत्पादक महंगाई (PPI) और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद वैश्विक सर्राफा बाजार में निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी है।
रात के बाजार आंकड़े (MCX और COMEX)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई मंदी के चलते भारतीय कमोडिटी (MCX) में भी देर रात कीमतें नीचे फिसल गईं:
- सोना (MCX Gold): एमसीएक्स पर सोना कमजोरी के साथ ₹1,53,400 से ₹1,53,600 प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) पर स्पॉट गोल्ड करीब 1.8% गिरकर $4,318 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया।
- चांदी (MCX Silver): चांदी में अधिक गिरावट रही और यह एमसीएक्स पर करीब ₹3,000 टूटकर ₹2,41,270 से ₹2,43,000 प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई। वैश्विक बाजार में चांदी 5.5% तक क्रैश होकर $63.62 प्रति औंस पर आ चुकी है।
गिरावट के मुख्य 3 कारण
- अमेरिका में PPI महंगाई का झटका:
अमेरिका में अगस्त महीने की प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) महंगाई दर 0.4% (महीने-दर-महीने) बढ़ी है, जिससे सालाना दर 5.4% पर पहुंच गई है। इसने फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी 15-16 सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका को 60-65% तक बढ़ा दिया है। - डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में उछाल:
ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.92% पर पहुंच गई है। डॉलर मजबूत होने से गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियां जैसे सोने-चांदी की चमक कम हो जाती है। - कच्चे तेल (Crude Oil) का दबाव:
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। तेल की महंगाई से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपना रहे हैं, जो सर्राफा बाजार के खिलाफ जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों का क्या है कहना?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक तक सोने और चांदी में यह उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रह सकता है।
- खरीदारों के लिए मौका: हाजिर बाजार में ऐतिहासिक उच्च स्तरों से आई यह सुस्ती उन लोगों के लिए बेहतर मौका हो सकती है जो त्योहारों या शादियों के लिए खरीदारी करना चाहते हैं।
- निवेशकों के लिए रणनीति: लंबी अवधि के लिए बाजार का आउटलुक सकारात्मक है, लेकिन छोटी अवधि में यह कमजोरी बनी रह सकती है। इसलिए एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह है।


