सरकार के बड़े फैसले से शुगर स्टॉक्स में हाहाकार: बलरामपुर चीनी और उत्तम शुगर के शेयर 6% तक धड़ाम
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में चीनी (Sugar) सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का माहौल देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा घरेलू बाजार में मिठास बनाए रखने और त्योहारों से पहले कीमतों को काबू में रखने के लिए लिए गए एक बड़े फैसले ने शुगर कंपनियों के निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। सरकार के इस कदम के बाद बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini) और उत्तम शुगर मिल्स (Uttam Sugar Mills) जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर 6 प्रतिशत तक क्रैश हो गए हैं।
सरकार का क्या है वो फैसला, जिससे बिगड़ा बाजार का मूड?
दरअसल, सरकार ने देश में चीनी की संभावित कमी को रोकने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 31 अक्टूबर तक बिना किसी सीमा शुल्क (Duty-free) के कच्ची चीनी (Raw Sugar) के आयात (Import) को हरी झंडी दे दी है।आसान शब्दों में कहें तो अब विदेशी बाजारों से बिना किसी टैक्स के कच्ची चीनी भारत मंगवाई जा सकेगी। सरकार के इस रणनीतिक कदम का सीधा उद्देश्य आगामी त्योहारी सीजन (रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और दिवाली) के दौरान देश में चीनी की उपलब्धता को बढ़ाना है ताकि आम जनता को महंगी चीनी न खरीदनी पड़े।शुगर स्टॉक्स पर क्यों पड़ा इसका बुरा असर?
शेयर बाजार के विश्लेषकों (Market Experts) के अनुसार, इस फैसले से शुगर कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा:
घरेलू कीमतों में गिरावट का डर: ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट के कारण विदेशी चीनी भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर उपलब्ध होगी। इससे घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें गिर सकती हैं, जिससे भारतीय मिलों का प्रॉफिट मार्जिन (मुनाफा) कम हो जाएगा।
सप्लाई में अचानक बढ़ोतरी: बिना किसी इम्पोर्ट ड्यूटी के बाजार में स्टॉक आने से सप्लाई की कोई कमी नहीं रहेगी। जब भी किसी कमोडिटी की सप्लाई बढ़ती है, तो उसकी कीमतें नीचे आना तय माना जाता है।
इन कंपनियों के शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट
सरकार के इस नोटिफिकेशन के बाहर आते ही निवेशकों ने शुगर स्टॉक्स से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया
बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini): कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में ही 5.8% से ज्यादा टूट गया।
उत्तम शुगर मिल्स (Uttam Sugar Mills): इसमें भी करीब 6% की लोअर सर्किट जैसी स्थिति देखी गई।
अन्य कंपनियां: डालमिया भारत शुगर, श्री रेणुका शुगर्स और द्वारिकेश शुगर के शेयरों में भी 3 से 5% तक की कमजोरी दर्ज की गई है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि लघु अवधि (Short-term) में शुगर स्टॉक्स पर यह दबाव बना रह सकता है। हालांकि, जो कंपनियां एथनॉल (Ethanol) उत्पादन में मजबूती से काम कर रही हैं, वे लंबी अवधि में इस झटके से उबर सकती हैं। खुदरा निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों पर नजर रखें।


