भारत और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से प्रतीक्षित ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। दिल्ली में आयोजित ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ के दौरान भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। राजदूत के अनुसार, इस समझौते के लगभग सभी प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं पर दोनों देशों के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है और अब केवल इसके कानूनी और तकनीकी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है
आयात शुल्क पचास प्रतिशत से घटकर अठारह प्रतिशत होने की उम्मीद
इस व्यापार समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस डील के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) को पचास प्रतिशत से घटाकर मात्र अठारह प्रतिशत तक सीमित कर सकता है। इस कटौती से भारत के जेनेरिक दवाओं (फार्मा), स्मार्टफोन, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल और रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) क्षेत्र को अमेरिकी बाजार में सीधी और बड़ी बढ़त हासिल होगी। इसके बदले में भारत भी अमेरिका से कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का आयात बढ़ा सकता है।
अक्टूबर में अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान लग सकती है मुहर
व्यापारिक गलियारों में इस डील को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। अमेरिकी राजदूत ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समझौते को अंतिम रूप देने और इस पर हस्ताक्षर करने के लिए अक्टूबर में भारत का आधिकारिक दौरा कर सकते हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी भी इस डील को लेकर लगातार अमेरिकी टीम के संपर्क में हैं। रक्षा और कूटनीति के बाद अब आर्थिक मोर्चे पर भारत और अमेरिका की यह नजदीकी चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


