Tuesday, October 6, 2026

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इंदौर : भागीरथपुरा में 36 मौतों का मामला: 500 पन्नों की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट पहुंची

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )

एक सदस्यीय जांच आयोग ने पूरी की जांच, सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट; नगर निगम से लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तक की भूमिका की जांच, 25 अगस्त को होगी सुनवाई

एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। 36 लोगों की मौत से जुड़े इस मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर हाई कोर्ट में पेश कर दी है। 500 से ज्यादा पन्नों की यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी गई है। रिपोर्ट में हाई कोर्ट द्वारा जांच के लिए तय किए गए सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है। फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब इस मामले में 25 अगस्त को सुनवाई होगी। कोर्ट ही तय करेगा कि रिपोर्ट को कब खोला जाए और इसकी प्रति मामले से जुड़े पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए या नहीं।

हाई कोर्ट ने गठित किया था जांच आयोग

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं लंबित हैं। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 27 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग को दूषित पानी की घटना के कारणों से लेकर मौतों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तक की जांच करनी थी।

निगम से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के दस्तावेज जुटाए

जांच के दौरान आयोग ने विभिन्न सरकारी विभागों से दस्तावेजी साक्ष्य लिए। इसमें नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों से जानकारी और रिकॉर्ड जुटाए गए। इसके अलावा भागीरथपुरा क्षेत्र के आम नागरिकों से भी शिकायतें और बयान लिए गए। स्थानीय लोगों से घटना के दौरान सामने आई समस्याओं, पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर जानकारी ली गई। इन सभी दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

सीलबंद रिपोर्ट में किसकी भूमिका?

जांच रिपोर्ट फिलहाल पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। इसलिए रिपोर्ट में किस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ क्या निष्कर्ष निकाला गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच के दायरे में उस समय जिम्मेदार रहे विभिन्न अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी शामिल रही है। इसमें तत्कालीन निगम अधिकारियों के साथ-साथ पार्षद और जलकार्य समिति प्रभारी की भूमिका की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव, तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और तत्कालीन कार्यपालन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय हुआ है या नहीं, यह रिपोर्ट सार्वजनिक होने और कोर्ट के समक्ष उसकी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कहा जा सकेगा।

36 मौतों के बाद उठे थे व्यवस्था पर सवाल

भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने और 36 मौतों की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद पेयजल व्यवस्था, पाइपलाइन की स्थिति, सीवेज प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई सावधानियों को लेकर सवाल उठे थे। इसी के बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा और जनहित याचिकाओं के जरिए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की गई। अब जांच आयोग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दूषित पानी की वजह क्या थी, जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे को लेकर क्या सिफारिश की गई है।

25 अगस्त को कोर्ट में सामने आएगा अगला कदम

500 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा होने के बाद अब सभी की नजर 25 अगस्त की सुनवाई पर है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि कोर्ट रिपोर्ट को किस तरह सार्वजनिक करता है और उसमें सामने आए निष्कर्षों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

नारायण शर्मा
नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।
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