Tuesday, October 6, 2026

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इंदौर : फर्जी 10वीं की मार्कशीट से 30 साल तक पुलिस की नौकरी, ASI कौशलेंद्र सिंह पर FIR

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )

पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक पर धोखाधड़ी का केस दर्ज; शिकायत के बाद जांच में सामने आया फर्जी शैक्षणिक रिकॉर्ड, माध्यमिक शिक्षा मंडल में दसवीं की मार्कशीट का रिकॉर्ड ही नहीं मिला

एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ पुलिस विभाग में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर करीब 30 साल तक नौकरी करने का मामला सामने आया है। पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ मल्हारगंज थाने में धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।पुलिस के मुताबिक चौहान के खिलाफ कुछ समय पहले शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई और जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट में उसकी दसवीं की मार्कशीट को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई।

दसवीं की मार्कशीट का रिकॉर्ड ही नहीं मिला

जांच के दौरान पुलिस ने चौहान की दसवीं की मार्कशीट के संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल से रिकॉर्ड की जानकारी मांगी। जांच में सामने आया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिकॉर्ड में चौहान की दसवीं की मार्कशीट का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके बाद विभागीय जांच में शैक्षणिक दस्तावेज की सत्यता पर सवाल खड़े हुए। जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक (रेडियो) चंद्रशेखर चंद्रावत ने मल्हारगंज थाने को पत्र भेजकर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। निर्देश मिलने के बाद गुरुवार को मल्हारगंज पुलिस ने एएसआई कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। अब पुलिस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नौकरी हासिल करने के लिए उनका इस्तेमाल करने और इस पूरे मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी।

अनुकंपा नियुक्ति में दिए थे दस्तावेज

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक चौहान की पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति हुई थी। आरोप है कि नियुक्ति हासिल करने के लिए उसने फर्जी शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रस्तुत किए थे। यदि जांच में यह आरोप साबित होता है तो यह भी जांच का विषय होगा कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और फर्जी रिकॉर्ड इतने लंबे समय तक विभागीय जांच से कैसे बचा रहा।

30 साल तक किसी को नहीं लगी भनक

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति हासिल करने का आरोप है, उसकी गड़बड़ी करीब तीन दशक बाद सामने आई। अब पुलिस और विभागीय स्तर पर यह भी जांच का विषय रहेगा कि इतने लंबे समय तक दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ और शिकायत सामने आने तक फर्जी रिकॉर्ड विभागीय प्रक्रिया में कैसे चलता रहा।

नारायण शर्मा
नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।
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