Tuesday, September 8, 2026

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Patna Protest: पटना में आरक्षण मार्च पर भारी बवाल, सुरक्षा घेरा तोड़ बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, न्यायपालिका में मांगी हिस्सेदारी

Patna Protest: पटना में आरक्षण मार्च पर भारी बवाल, सुरक्षा घेरा तोड़ बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, न्यायपालिका में मांगी हिस्सेदारी

पटना: बिहार की राजधानी पटना में “आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ” आंदोलन के तहत हजारों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। गांधी मैदान से लोकभवन की ओर कूच कर रहे इस विशाल मार्च को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा की गई कड़ी घेराबंदी के चलते पूरे शहर में कई घंटों तक भारी तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

अभूतपूर्व घेराबंदी: पहली बार लगाए गए लोहे की शील्ड और कंटीले तार

प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक अमले ने सुरक्षा के बेहद कड़े और अलग इंतजाम किए थे। आंदोलनकारियों के रूट को रोकने के लिए प्रमुख चौराहों पर मजबूत लोहे की शील्ड खड़ी की गई थीं और उनके ऊपर धारदार कंटीले (कांटेदार) तारों की कई परतें बिछाई गई थीं। पटना की सड़कों पर इस तरह की तीखी और पैनी बैरिकेडिंग देखकर प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश फैल गया।

जेपी गोलंबर पर तीखी झड़प, बैरिकेड्स पर चढ़े लोग

जैसे ही प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर, तख्तियां और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लेकर आगे बढ़े, पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें रोक दिया। इससे गुस्साए दर्जनों प्रदर्शनकारी सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के ऊंचे बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए और व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी धक्का-मुक्की और रस्साकशी हुई। कुछ लोगों ने बैरिकेड्स लांघने की कोशिश भी की, जिन्हें बल प्रयोग कर पीछे खदेड़ा गया।

प्रदर्शनकारियों की 3 प्रमुख मांगें:

सड़कों पर उतरे विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की:

  1. उच्च न्यायपालिका में हिस्सेदारी: प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और उच्च न्यायालयों (High Courts) में तत्काल प्रभाव से आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए और मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम में बदलाव हो।
  2. संविधान की 9वीं अनुसूची का कवच: बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाने से जुड़े कानूनों को कानूनी चुनौतियों से बचाने के लिए उन्हें संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई।
  3. निजी क्षेत्र और प्रमोशन में कोटा: सरकारी नौकरियों में वंचित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति (प्रमोशन) में आरक्षण देने और इसके साथ ही प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की नीति लागू करने की मांग की गई।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

मुस्तैद सुरक्षाबलों ने स्थिति को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए सड़कों पर पहले से ही वज्र वाहनों और वाटर कैनन को तैनात कर रखा था। जब प्रदर्शनकारी लोकभवन जाने की जिद पर अड़ गए और कटीले तारों को पार करने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। माहौल को शांत करने के लिए मार्च का नेतृत्व कर रहे मुख्य संयोजकों और कई प्रमुख पदाधिकारियों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया, जिसके बाद इस आंदोलन को नियंत्रित किया जा सका।


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