मॉडल जैसा लुक, 1AC का सफर… जानिए कौन है नेहा झा और कैसे बनी बिहार में शराब तस्करी की ‘क्वीन’
समस्तीपुर: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद तस्करों ने कमाई के लिए बेहद हाई-टेक और वीआईपी तरीके अपनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला समस्तीपुर जंक्शन का है, जहां स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी (1AC) कूपे से पुलिस ने एक ऐसी हाई-प्रोफाइल शराब तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसे देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी दंग रह गईं।
काले लिबास, मॉडल जैसे ‘किलर’ लुक और चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास लिए 25 वर्षीय नेहा झा को देखकर पहली नजर में कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि वह वीआईपी अंदाज में विदेशी शराब की तस्करी कर रही थी। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में नेहा झा को उसके साथी ईशान कुमार (जो कि एक बी.टेक इंजीनियर है) के साथ दबोचा गया है। उनके पास से महंगे सूटकेस और ट्रॉली बैग में भरी 75 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई है।
आइए जानते हैं स्नातक (Graduate) पास नेहा झा की शराब तस्करी के दलदल में उतरने की पूरी इनसाइड स्टोरी।
1. मजबूरी नहीं, ‘फैमिली बिजनेस’ बन चुका था यह धंधा
पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह है नेहा के परिवार का आपराधिक इतिहास। नेहा ने यह रास्ता किसी तात्कालिक मजबूरी में नहीं चुना, बल्कि उसके घर में यह काम एक सिंडिकेट की तरह चल रहा था:
- पिता की गिरफ्तारी: नेहा के पिता संजय कुमार झा को करीब दो साल पहले उत्पाद विभाग (Excise Department) ने शराब तस्करी के मामले में ही जेल भेजा था।
- बड़ी बहन का सिंडिकेट: पिता के जेल जाने के बाद नेहा की बड़ी बहन निशु झा ने इस पूरे नेटवर्क को अपने हाथ में ले लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि निशु को भी पुलिस कुछ समय पहले शराब की खेप के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
- नेहा की एंट्री: जब पिता और बड़ी बहन दोनों सलाखों के पीछे पहुंच गए, तो घर की सबसे छोटी और पढ़ी-लिखी बेटी नेहा झा ने इस ‘पारिवारिक बिजनेस’ की कमान संभाल ली। उसने पुराने नेटवर्क को दोबारा सक्रिय किया और खुद दिल्ली से शराब की सप्लाई लाइन संभालने लगी।
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2. जीजा का भाई बना पार्टनर, ‘क्लास’ देखकर पुलिस भी चकराई
इस बार दिल्ली से शराब की इतनी बड़ी खेप लाने के लिए नेहा ने अपने एक दूर के रिश्तेदार (जीजा के भाई) ईशान कुमार को अपने साथ शामिल किया था। ईशान पढ़ा-लिखा बी.टेक इंजीनियर है। दोनों ने मिलकर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया।
उन्होंने साधारण बसों या ट्रेनों के स्लीपर कोच को छोड़कर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच का टिकट लिया। उनका मानना था कि वीआईपी कूपे, महंगे ब्रांडेड सूटकेस और नेहा के ग्लैमरस लुक व फराटेदार अंग्रेजी को देखकर कोई भी पुलिसकर्मी उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं करेगा।
3. टारगेट पर थे ‘वीआईपी’ ग्राहक और डॉक्टर्स
नेहा सामान्य शराब तस्करों की तरह लोकल सप्लायर्स या चौक-चौराहों पर माल नहीं बेचती थी। वह दिल्ली से सिर्फ महंगी और ब्रांडेड विदेशी शराब (जैसे प्रीमियम व्हिस्की और वोदका) लाती थी। बिहार में शराबबंदी के कारण इन ब्रांडेड बोतलों के शौकीन लोग मुंह मांगी कीमत देने को तैयार रहते हैं।
नेहा का यह सिंडिकेट दरभंगा और समस्तीपुर के बड़े-बड़े व्यापारियों (Businessmen), सफेदपोशों और डॉक्टरों को टारगेट करता था। ऑर्डर मिलने पर सीधे उनके घरों तक सुरक्षित होम डिलीवरी पहुंचाई जाती थी, जिसके बदले इन्हें प्रति बोतल तीन से चार गुना ज्यादा मुनाफा मिलता था।
4. ओवर-कॉन्फिडेंस और ‘बिना टिकट’ का रौब ले डूबा
नेहा और ईशान अपने प्लान को लेकर इतने आश्वस्त थे कि वे फर्स्ट एसी के कूपे में बिना टिकट ही सवार हो गए थे। लेकिन समस्तीपुर रेल मंडल की खुफिया टीम को इसकी सटीक भनक (Tip-off) लग चुकी थी। जैसे ही ट्रेन समस्तीपुर जंक्शन पहुंची, आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने कूपे में धावा बोल दिया।
शुरुआत में नेहा ने महिला पुलिसकर्मियों पर अपनी अंग्रेजी और तेज-तर्रार तेवरों से रौब झाड़ने की कोशिश की। उसका आत्मविश्वास देखकर एक पल को अधिकारी भी झिझक गए, लेकिन जब सख्ती से बैग खुलवाए गए, तो सबके होश उड़ गए। बैग के अंदर कपड़ों के बीच बेहद करीने से विदेशी शराब की बोतलें छिपाई गई थीं।
5. उम्र का अजीब और डरावना संयोग
सोशल मीडिया और पुलिस महकमे में एक अजीब संयोग की चर्चा हो रही है। नेहा की बड़ी बहन निशु झा जब ठीक 25 साल की हुई थी, तब वह भी शराब तस्करी करते हुए पकड़ी गई थी। अब नेहा भी ठीक 25 साल की उम्र में इसी जुर्म में सलाखों के पीछे पहुंच गई है। फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और दिल्ली के सप्लायरों का पता लगाने के लिए दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।


