मरीजों की बेबसी: जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर हाथ में ड्रिप लेकर पैदल चली महिला, स्वास्थ्य केंद्रों में भी पसरी बदहाली
सीधी।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक बेहद संवेदनशील और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक, बदइंतजामी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल: स्ट्रेचर मिला नहीं, जमीन पर लेटने को मजबूर हुई गंभीर मरीज
ग्राम गोडाही की रहने वाली राजकली कुशवाहा को ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की शिकायत के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें पुराने भवन से नए महिला वार्ड में शिफ्ट करने का निर्देश दिया। लेकिन संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब मरीज को शिफ्ट करने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया।
गंभीर रूप से बीमार महिला एक हाथ में अपनी ड्रिप (IV फ्लूइड) की बोतल थामे, परिजनों के सहारे पैदल चलकर नए वार्ड तक पहुंची। परिजनों का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद भी उन्हें बेड नसीब नहीं हुआ, जिससे मरीज को फर्श पर ही लेटना पड़ा। वार्ड में कोई भी जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मी मदद के लिए मौजूद नहीं था, जिसके बाद निराश होकर परिजन मरीज को एक निजी अस्पताल ले गए।
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मझौली और सेमरिया स्वास्थ्य केंद्रों का भी बुरा हाल
जिला अस्पताल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बदतर है:
- मझौली में पंखे बंद, उमस से बेहाल मरीज: मझौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी गई। अस्पताल के वार्डों में बिजली चालू होने के बावजूद पंखे बंद पड़े हैं। इस उमस भरी गर्मी और मच्छरों के प्रकोप के बीच मरीज और उनके अटेंडर नरकीय स्थिति में रहने को मजबूर हैं।
- सेमरिया में ओपीडी समय पर नहीं, कर्मचारी नदारद: सेमरिया के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और स्टाफ की मनमानी चरम पर है। सुबह 9 बजे ओपीडी शुरू होने का समय तय है, लेकिन जिम्मेदार डॉक्टर और कर्मचारी 10 बजे तक भी ड्यूटी पर नहीं पहुंचते। दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
प्रशासन का दावा: सुधार के प्रयास जारी
सीधी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अशोक खरे ने इस पूरे मामले पर कहा है कि वे लगातार विभिन्न अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने माना कि व्यवस्थाओं में कमियां हैं और वे इन लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दुरुस्त करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, धरातल पर मरीजों को अब भी राहत का इंतजार है।


