धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन, जहाँ महाकाल की भस्म आरती देखने दुनिया भर से लोग आते हैं, वहीं से एक ऐसी खौफनाक और दिल dela देने वाली कहानी सामने आई है जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक रील्स (Reels) बनाने के चक्कर में एक ‘फर्जी’ अघोरी तांत्रिक ने सनातन धर्म की पवित्र परंपरा और एक मृत इंसान के शव के साथ वो घिनौना कृत्य किया, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।
यह कहानी है काली उर्फ नंदगिरी (कालीनंद गिरी) की, जिसे उज्जैन पुलिस ने जलती चिता से इंसानी मांस निकालकर खाने और शव के अपमान के आरोप में गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस की फाइल से जो खुलासे हुए हैं, वे किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं।
श्मशान घाट का वो खौफनाक वीडियो, जिसने हड़कंप मचा दिया
कहानी की शुरुआत होती है उज्जैन के जीवाजीगंज क्षेत्र में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक चक्रतीर्थ श्मशान घाट से। अमूमन इस श्मशान घाट पर तंत्र साधना करने वाले अघोरी आते हैं, लेकिन जो कुछ दिन पहले हुआ, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर एक शव का अंतिम संस्कार हो रहा था। चिता धधक रही थी। तभी वहाँ लाल और काले कपड़ों में लिपटी, गले में नरमुंड की माला पहने, हाथ में एक चमचमाती हुई तलवार लिए ‘काली उर्फ नंदगिरी’ पहुँचती है। कैमरे के सामने पोज देते हुए काली जलती हुई चिता के बिल्कुल करीब जाती है। इसके बाद वो अपनी तलवार से चिता के बीच से जलते हुए इंसानी मांस के टुकड़ों (शव के अवशेष) को बाहर निकालती है।
क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब काली ने उस मांस को कैमरे के सामने चबाना शुरू कर दिया। वीडियो में उसे साफ कहते सुना गया कि “यह बहुत गर्म और स्वादिष्ट है…”। इस अमानवीय कृत्य का बकायदा वीडियो रिकॉर्ड किया गया और खुद काली ने इसे भारी-भरकम संगीत के साथ अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर दिया।
संत समाज का आक्रोश और आधी रात को पुलिस का एक्शन
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उज्जैन के संत समाज, अखाड़ों और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना था कि यह केवल मृत आत्मा का अपमान नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर एक गहरा आघात है।
मामला बढ़ता देख सेनापति काल भैरव कमेटी और अघोरी अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा विष्णुनाथ तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने वीडियो के सबूतों के साथ जीवाजीगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उज्जैन पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन टीम गठित की और आधी रात को चक्रतीर्थ आश्रम के पास घेराबंदी करके आरोपी काली उर्फ नंदगिरी को दबोच लिया।
पुलिस ने काली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 (शव के साथ अमानवीय व्यवहार करना और श्मशान की शांति भंग करना) और आर्म्स एक्ट (अवैध तलवार रखने) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे सीधे कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।Alluri Srinivas se Kaise Bani Aghori Kali? Police taptish me bada khulasa!
चौंकाने वाला खुलासा- ‘अल्लूरी श्रीनिवास’ से ‘अघोरी काली’ बनने का सफर
पुलिस की कस्टडी में जब काली उर्फ नंदीगिरी से पूछताछ शुरू हुई, तो उसके अतीत की परतें खुलती चली गईं। पुलिस की तफ्तीश में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वो यह था कि काली कोई जन्मजात महिला या किन्नर नहीं है।
उसका असली नाम अल्लूरी श्रीनिवास है। वह मूल रूप से एक पुरुष था। कुछ साल पहले उसने मेडिकल सर्जरी के जरिए अपना जेंडर चेंज (लिंग परिवर्तन) कराया और खुद को एक महिला/किन्नर के रूप में तब्दील कर लिया। इसके बाद उसने अघोरी का भेष धारण किया और खुद को किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर घोषित कर दिया।
इतना ही नहीं, police को यह भी पता चला कि आरोपी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद संदिग्ध है। उस पर पहले कई भोले-भाले लोगों को शादी के नाम पर झांसा देने और उनके साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी (मैरिज फ्रॉड) करने के भी संगीन आरोप लग चुके हैं।
“मैं मारने को भी तैयार हूँ…” – गिरफ्तारी से पहले पुलिस को खुली चुनौती
इस कहानी का एक और खौफनाक पहलू तब सामने आया जब FIR दर्ज होने के बाद और गिरफ्तारी से ठीक पहले काली ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो जारी किया। इस वीडियो में पश्चाताप या डर के बजाय उसके चेहरे पर एक अजब सा अहंकार और गुस्सा था।
उसने पुलिस और आम जनता को खुली चुनौती देते हुए कहा, “जो लोग मेरे पीठ पीछे बात कर रहे हैं, वो सामने आएं. मैं मरने के लिए भी तैयार हूँ और मारने के लिए भी रेडी हूँ. किसी में दम है तो मेरे सामने आकर बात करे।” हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसका यह सारा अहंकार धरा का धरा रह गया।
रील्स और व्यूज का चक्कर: असली अघोरी संतों ने खोली काली की पोल।
इस पूरे कांड के बाद उज्जैन के असली अघोर समुदाय और जूना अखाड़े के संतों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। अघोर संतों का कहना है कि:
- शास्त्रों में ऐसा कोई नियम नहीं: सनातन धर्म के किसी भी शास्त्र या प्रामाणिक अघोर परंपरा में जलती चिता से जबरन मांस निकालना या इस तरह का वीभत्स प्रदर्शन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। अघोर साधना बेहद गुप्त और मर्यादित होती है, न कि सोशल मीडिया पर नुमाइश करने के लिए।
- सिर्फ रील्स और व्यूज का लालच: संतों का स्पष्ट आरोप है कि आरोपी काली का किसी वैध गुरु परंपरा से कोई नाता नहीं है। उसने सिर्फ और सिर्फ इंस्टाग्राम पर लाइक्स, फॉलोअर्स और व्यूज बटोरने के लिए और खुद को इंटरनेट पर वायरल करने के लिए अघोर परंपरा का सहारा लेकर यह घटिया नाटक रचा।
- कानून का शिकंजा
फिलहाल ‘अघोरी काली’ सलाखों के पीछे अपनी इस करतूत की सजा काट रही है। उज्जैन पुलिस चक्रतीर्थ श्मशान घाट के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सोशल मीडिया पर सस्ते फेम (Fame) के लिए लोग किस हद तक गिर सकते हैं।
FAQ: Ujjain Aghori Kali Kand se jude sawal aur jawab
Q1. उज्जैन में अघोरी काली उर्फ नंदगिरी को क्यों गिरफ्तार किया गया?
Ans: आरोपी काली उर्फ नंदगिरी को उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर जलती हुई चिता से शव के अवशेष (इंसानी मांस) निकालकर खाने, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने और शव का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
Q2. अघोरी काली उर्फ नंदगिरी का असली नाम और बैकग्राउंड क्या है?
Ans: पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी का असली नाम अल्लूरी श्रीनिवास है। वह मूल रूप से एक पुरुष था, जिसने बाद में मेडिकल सर्जरी के जरिए जेंडर चेंज (लिंग परिवर्तन) कराया और खुद को किन्नर अघोरी के रूप में स्थापित किया।
Q3. पुलिस ने अघोरी काली पर कौन सी कानूनी धाराएं लगाई हैं?
Ans: उज्जैन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 (शव के साथ अमानवीय व्यवहार और गरिमा को ठेस पहुंचाना) और अवैध हथियार (तलवार) रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।


