Monday, September 28, 2026

TOP NEWS

ब्लडी मंडे: शेयर बाजार...

Share Market Crash Today: शेयर बाजार में भारी गिरावट! निफ्टी 23,000 के नीचे फिसला और सेंसेक्स 950 अंक टूटा। जानिए बाजार गिरने की 4 बड़ी वजहें और निवेशकों को कितना हुआ नुकसान।

IIT Bombay Student Death:...

IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे मौत मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में बड़ा खुलासा। आत्महत्या से पहले आखिरी कॉल में दोस्त से बयां किया था परीक्षा का तनाव। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

ब्राह्मणों ने कभी राज...

शिवपुरी में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में बोले पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा- जो ब्राह्मणों का विरोध कर रहे हैं, उनके अंदर का दानव जाग्रत हो गया है। राहुल गांधी के ईवीएम वाले बयान पर भी साधा निशाना। पढ़ें पूरी खबर।

CEC के खिलाफ भोपाल...

भोपाल में CEC के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने किया मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर का घेराव; मतदाता सूची में गड़बड़ी का लगाया आरोप। पूरी खबर पढ़ें।
Homeदेशमध्य प्रदेश के मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर: अष्टमुखी शिवलिंग का अद्भुत रहस्य

मध्य प्रदेश के मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर: अष्टमुखी शिवलिंग का अद्भुत रहस्य


शीर्षक: शिवना नदी के आंचल में बसा पशुपतिनाथ धाम: जहाँ नदी स्वयं करती है भगवान शिव का जलाभिषेक
विशेष संवाददाता
मंदसौर:
भारत में भगवान शिव के अनेक दिव्य और रहस्यमयी मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में शिवना नदी के तट पर स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर अपने आप में अतुलनीय है। नेपाल के काठमांडू के बाद पूरे विश्व में केवल यही एक ऐसा स्थान है जहाँ भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी (आठ मुखों वाली) प्रतिमा विराजमान है।
नदी से प्रकट हुई अद्भुत प्रतिमा
इस प्राचीन धाम का इतिहास बेहद दिलचस्प है। मान्यता और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1961 में यह विशाल शिवलिंग शिवना नदी के गर्भ से बहकर बाहर आया था। इस प्रतिमा की उंचाई लगभग 7.5 फीट और वजन कई टन है।
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, प्रतिमा में उकेरे गए आठों मुख मनुष्य के जीवन की चार अवस्थाओं—बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था को दर्शाते हैं। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग भाव उजागर करता है, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
शिवना नदी करती है ‘जलहरी’ का अभिषेक
इस मंदिर की सबसे बड़ी अलौकिक विशेषता यह है कि मानसून के दौरान जब शिवना नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो नदी का पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचकर भगवान शिव का चरण स्पर्श करता है। स्थानीय लोग इसे ‘नदी द्वारा जलाभिषेक’ कहते हैं, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।
धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों का मानना है कि यह प्रतिमा गुप्तकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ लाखों भक्तों का मेला लगता है। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने इसे एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया है, जिससे यह न केवल आस्था का, बल्कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण बना हुआ है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments