BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र मंजूर; डॉलर को बड़ा झटका, लोकल करेंसी में व्यापार और फास्ट पेमेंट पर बनी सहमति
नई दिल्ली:
भारत की मेजबानी में राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के पहले ही दिन आर्थिक और व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। सदस्य देशों के बीच जारी कड़े कूटनीतिक मंथन के बाद सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को मंजूरी दे दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसका आधिकारिक ऐलान किया।
इस समिट का सबसे बड़ा फोकस वैश्विक व्यापार और देशों की आर्थिक व्यवस्था रहा। ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने और आपस में बिजनेस को और आसान बनाने के लिए कई क्रांतिकारी फैसलों पर मुहर लगाई है।
1. कॉमन करेंसी का प्रस्ताव खारिज, स्थानीय मुद्राओं (Local Currency) पर जोर
अक्सर यह चर्चाएं रहती हैं कि क्या ब्रिक्स देश मिलकर कोई नई साझा करेंसी लाएंगे? विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी भी तरह की ‘ब्रिक्स करेंसी’ लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसकी जगह सभी देश अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं (जैसे भारत का रुपया और रूस का रूबल) में ही द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन की लागत (Cost) काफी कम हो जाएगी।
2. आपस में जुड़ेंगे देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम (UPI और अन्य नेटवर्क)
ग्लोबल ट्रेड को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए देशों के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आपस में जोड़ने की बात कही गई है। इसके तहत भारत का UPI और अन्य सदस्य देशों की त्वरित भुगतान प्रणालियों को आपस में लिंक करने पर विचार चल रहा है। ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स को एक ऐसे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है जो तेज, सस्ता और पूरी तरह सुरक्षित हो।
3. ‘प्रिविलेज के पिरामिड’ को बदलना होगा: पीएम मोदी
समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक फैसले लेने वाली मौजूदा व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज का ग्लोबल स्ट्रक्चर एक ‘पिरामिड’ की तरह दिखता है, जिसमें टॉप पर बैठे कुछ ताकतवर देश फैसले लेते हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इस व्यवस्था को अब ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ में बदलने की जरूरत है ताकि विकासशील देशों (Global South) को भी नियम तय करने का अधिकार मिले।
4. छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स के लिए बड़ा कदम
आर्थिक मोर्चे पर भारत ने छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स देश मिलकर इंडस्ट्रियल पार्क्स का विकास करेंगे और एक-दूसरे के स्टार्टअप्स के आइडिया व टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देंगे, जिससे छोटे व्यापारियों को ग्लोबल मार्केट तक सीधी पहुंच मिल सके।


