संवाददाता महेश राठौड़
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। जुन्नारदेव अंचल के ग्राम जामुनडोगा में पक्की सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को परिजन 8 किलोमीटर तक डोली में ढोकर ले जाने के लिए मजबूर हुए। इस देरी की वजह से पेट में ही शिशु की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
8 किलोमीटर तक कंधे पर ढोई जिंदगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जामुनडोगा निवासी 22 वर्षीय कुस्तरिया (पति सोनू मलगाम) को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन गांव तक पक्की सड़क और संपर्क मार्ग न होने के कारण एंबुलेंस गांव से 8 किलोमीटर दूर गोप पंचायत भवन के पास ही रुक गई। महिला की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी के डंडे और कपड़े की मदद से एक अस्थाई डोली बनाई और उबड़-खाबड़ रास्तों पर 8 किलोमीटर पैदल चलकर एंबुलेंस तक पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने घोषित किया मृत
पंचायत भवन के पास से महिला को एंबुलेंस के जरिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दमुआ ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए छिंदवाड़ा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण पेट में ही नवजात की मौत हो चुकी है। महिला की हालत चिंताजनक होने पर उसे तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती किया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
10 वर्षों से आवेदन, लेकिन अब तक नतीजा सिफर
स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे बीते 10 वर्षों से गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दे रहे हैं। इसके बावजूद आज तक गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह घटना एक बार फिर राज्य के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


