UGC नियमों और आरक्षण के खिलाफ जंतर-मंतर पर बड़ा बवाल; पुलिस से झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों ने किया राजघाट कूच, सुरक्षा सख्त
नई दिल्ली, 21 अगस्त: राष्ट्रीय राजधानी का जंतर-मंतर आज उस समय छावनी में तब्दील हो गया जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी नियमों और जातिगत आरक्षण के विरोध में देश भर से आए हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए। सोशल मीडिया संगठन ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ (RHA) के आह्वान पर जुटे प्रदर्शनकारियों की दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के साथ तीखी झड़प हुई। बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने कई प्रमुख आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी राजघाट की ओर बढ़ गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू कर दी गई है।
कोर्ट की टिप्पणी और सरकार का रुख
विवाद के केंद्र में रहे ‘यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026’ पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि केंद्र सरकार इन नियमों पर पुनर्विचार (Reconsideration) कर रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक (Stay) लगाते हुए इन्हें प्रथम दृष्टया “अस्पष्ट” बताया था और कहा था कि इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों का 5-सूत्रीय मांग पत्र
सड़कों पर उतरे युवाओं ने सरकार के सामने पाँच मुख्य माँगें रखी हैं:
- आर्थिक आधार पर आरक्षण: जाति व्यवस्था को हटाकर केवल पारिवारिक आय और गरीबी को आरक्षण का पैमाना बनाया जाए।
- एक परिवार, एक आरक्षण: आरक्षण का लाभ किसी भी परिवार की केवल एक ही पीढ़ी को मिले, ताकि इसका दोहरा फायदा रोका जा सके।
- योग्यता (Merit) को सम्मान: प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स अनिवार्य हों और खाली सीटों को सामान्य वर्ग से भरा जाए।
- 50% सीमा पर फ्रीज: सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50% की आरक्षण सीमा को फ्रीज किया जाए और राजनीतिक दलों के कोटा बढ़ाने के चुनावी वादों पर रोक लगे।
- सनसेट क्लॉज (Sunset Clause): देश में आरक्षण नीति को हमेशा के लिए समाप्त करने की एक निश्चित अंतिम तारीख (End Date) घोषित की जाए।

यूजीसी के विरोध में जंतर मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी
आरक्षण हटाओ आंदोलन (RHA) की प्रमुख अनुराधा तिवारी ने कहा:
"सरकार सिर्फ नियमों पर पुनर्विचार का लॉलीपॉप देकर हमारे आंदोलन को भटकाना चाहती है। जब तक यूजीसी के इन भेदभावपूर्ण नियमों को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और आरक्षण का आधार पूरी तरह आर्थिक नहीं किया जाता, हमारा यह देशव्यापी आंदोलन थमने वाला नहीं है।"
आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता अभिषेक अग्निहोत्री ने राजघाट मार्च के दौरान कहा:
"पुलिस हमें लाठियों और हिरासत के दम पर चुप नहीं करा सकती। अगर हमें जंतर-मंतर से जबरन हटाया गया है, तो हम बापू की समाधि (राजघाट) पर बैठकर अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेंगे। अगर वहाँ से भी रोका गया, तो हम फिर जंतर-मंतर लौटेंगे।"
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कानून-व्यवस्था पर बयान दिया:
"जंतर-मंतर पर इस विरोध प्रदर्शन की कोई लिखित अनुमति नहीं दी गई थी। हमने आयोजकों को रामलीला मैदान में सीमित संख्या के साथ प्रदर्शन का विकल्प दिया था, जिसे उन्होंने नहीं माना। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।"
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी
हजारों की भीड़ और राजघाट मार्च के कारण लुटियंस दिल्ली और मध्य दिल्ली की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- इन रास्तों से बचें: कनॉट प्लेस (CP), संसद मार्ग, जनपथ, अशोक रोड, रफी मार्ग और इंडिया गेट की तरफ जाने वाले रास्तों पर भारी जाम है और कई जगह रूट डायवर्ट किए गए हैं।
- यात्रियों को सलाह: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता को जाम से बचने के लिए सड़क मार्ग के बजाय दिल्ली मेट्रो सेवाओ


