नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी जोन जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों और अधिकारियों पर तीन महिला पत्रकारों के साथ गंभीर बदसलूकी, मारपीट और यौन उत्पीड़न (गलत तरीके से छूने) के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घटना के बाद से दिल्ली का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष और पत्रकार संगठनों ने दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया है।
1. क्या है पूरा मामला?
जंतर-मंतर पर ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस दौरान इलाक़े में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पहले की धारा 144) लागू थी।
पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देकर हिरासत (Detention) में ले रही थी, उसी दौरान वहां ग्राउंड कवरेज कर रही तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप लगाया।
2. पीड़ित पत्रकारों के गंभीर आरोप
- सीने पर हाथ मारने और गलत तरीके से छूने का दावा: पीड़ितों में से एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेने की प्रक्रिया (Manhandling) के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (ACP रैंक) और स्टाफ ने उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया और सीने पर हाथ मारा।
- थाने में शिकायत दर्ज: घटना के बाद शाम करीब 6:00 बजे तीनों महिला पत्रकार नई दिल्ली जिला के संसद मार्ग थाने पहुंचीं और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के बाद उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
3. पुलिस की कार्रवाई: क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच
मामला बढ़ता देख दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस केस को जिले की पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच (Crime Branch) को ट्रांसफर कर दिया है।
- दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए मामले को अपराध शाखा (Crime Branch) को सौंप दिया गया है।
- क्राइम ब्रांच की कमला मार्केट यूनिट अब इस पूरे घटनाक्रम और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की कड़ियों को खंगालेगी।
4. CJP और पत्रकारों का फूटा गुस्सा, FIR की मांग
इस घटना के बाद सीजेपी (CJP) के पदाधिकारियों और सैकड़ों पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय और संसद मार्ग थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
- कैमरे जमीन पर रखकर विरोध: पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने कैमरे और माइक आईडी जमीन पर रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
- एफआईआर (FIR) की मांग: प्रदर्शनकारियों और पीड़ित पत्रकारों का कहना है कि सिर्फ जांच क्राइम ब्रांच को सौंपना काफी नहीं है, बल्कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज की जानी चाहिए।
5. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। महिलाओं की सुरक्षा करने वाले ही जब उनके खिलाफ हाथ उठाएंगे, तो इंसाफ की उम्मीद किससे की जाएगी?
क्राइम ब्रांच ने लोगों और मीडिया कर्मियों से अपील की है कि यदि इस घटना से जुड़ा कोई भी वीडियो फुटेज या सबूत किसी के पास उपलब्ध हो, तो उसे जांच टीम के साथ साझा करें ताकि सच्चाई सामने आ सके।


